पारा मेडिकल इंस्टीच्यूट के अस्तित्व पर मंडराया खतरा

लखीसराय। राज्य सरकार के नीतिगत निर्णय के तहत प्रत्येक जिले में तकनीकी शिक्षण एवं प्रशिक्षण

JagranFri, 18 Jun 2021 07:37 PM (IST)
पारा मेडिकल इंस्टीच्यूट के अस्तित्व पर मंडराया खतरा

लखीसराय। राज्य सरकार के नीतिगत निर्णय के तहत प्रत्येक जिले में तकनीकी शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान खोले जा रहे हैं। सरकार के दबाव के कारण जिला प्रशासन जनोपयोगी एवं सुलभ स्थल को छोड़कर जहां आसानी से जमीन मिल जाती है उसकी चयन करके भेज देता है। इसका नतीजा यह होता है कि सरकार की लाखों-करोड़ों रुपये की बर्बादी हो जाती है। ऐसा ही मामला लखीसराय जिले का भी है। यहां का पारा मेडिकल इंस्टीच्यूट उद्घाटन के पहले ही अपने भविष्य को लेकर चितित है। बरसात शुरू होते ही किऊल नदी का जलस्तर उफान पर है और तेजी से कटाव शुरू हो गया है। ऐसे में पारा मेडिकल इंस्टीच्यूट के साथ ही विद्युत सब स्टेशन तेतरहाट (नोनगढ़) का भी अस्तित्व खतरे में आ गया है।

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मलिया-तेतरहाट पुल के पास नदी किनारे है इंस्टीच्यूट

करीब पांच साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी सुनील कुमार को केंद्रीय विद्यालय, इंजीनियरिग कॉलेज, पारा मेडिकल इंस्टीच्यूट, नोनगढ़ विद्युत सब स्टेशन के लिए जमीन खोजने की चुनौती थी। सभी सीओ को टास्क दिया गया। फिर तय हुआ कि केंद्रीय विद्यालय, इंजीनियरिग कॉलेज एवं पारा मेडिकल इंस्टीच्यूट जिला मुख्यालय के इर्द-गिर्द ही बने। इसलिए तेतरहाट के पास उक्त जमीन का निरीक्षण किया गया जहां अभी पारा मेडिकल इंस्टीच्यूट और विद्युत सब स्टेशन है। केंद्रीय विद्यालय समिति ने नदी किनारे की जमीन रहने के कारण उसे लेने से मना कर दिया। इसके बाद तत्कालीन डीएम ने उक्त जमीन पर पारा मेडिकल इंस्टीच्यूट बनाने का निर्णय ले लिया।

----- किऊल नदी में हो रहा तेजी से कटाव

किऊल नदी यूं तो बरसाती है और यह पानी के लिए कम बालू के लिए अधिक जानी जाती है। यदि बिहार और झारखंड में लगातार बारिश हो तो यह नदी काल बनकर दौड़ पड़ती है। कुछ वर्ष पूर्व ही लखीसराय के विद्यापीठ चौक के पास एनएच 80 पुल के पास एक बड़ा हिस्सा को यह नदी तोड़ बहा ले गई थी। उसमें एक बाइक सवार की मौत भी हो गई थी। अभी मानसून की पहली बारिश लगातार होने के कारण नदी का जलस्तर उफान पर है। मलिया पुल के पास मिट्टी का तेजी से कटाव हो रहा है। ऐसे में पारा मेडिकल इंस्टीच्यूट और विद्युत सब स्टेशन पर कटाव का खतरा बढ़ गया है। नदी का कटाव मात्र 50-60 फीट दूर रह गया है। यदि कटाव की रफ्तार यही रही तो पारा मेडिकल इंस्टीच्यूट नदी में समा जा सकती है।

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नदी सुरक्षा तटबंध का निर्माण नहीं

जिस समय पारा मेडिकल इंस्टीच्यूट बनाया गया था उस समय नदी की तरफ से सुरक्षा तटबंध नहीं बनाया गया। भवन की घेराबंदी के लिए चहारदीवारी बना दी गई। सुरक्षा तटबंध के अभाव में भवन को नदी की तरफ से खतरा है। अभी इंस्टीच्यूट का शुभारंभ भी नहीं हुआ है और इसके अस्तित्व पर खतरा खड़ा हो गया है। इसकी सुरक्षा के लिए तत्काल तटबंध जरूरी है। हालांकि यदि दो चार दिन बारिश नहीं हो तो नदी के जलस्तर में स्वत: कमी आ जाएगी लेकिन प्रकृति पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

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