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सदर अस्पताल : यदि आग लगे तो मरीजों का भगवान ही मालिक

सदर अस्पताल : यदि आग लगे तो मरीजों का भगवान ही मालिक

लखीसराय। सदर अस्पताल लखीसराय समस्याओं की मकड़जाल में उलझा हुआ है। यहां एक भी ऐसी व्यवस्था

JagranSun, 25 Apr 2021 10:47 PM (IST)

लखीसराय। सदर अस्पताल लखीसराय समस्याओं की मकड़जाल में उलझा हुआ है। यहां एक भी ऐसी व्यवस्था नहीं जो रोगियों के हित में हो। कोरोना काल ने तो पोल ही खोलकर रख दी है। अभी गर्मी के इस मौसम में यदि किसी कारण आग लग जाए तो महाराष्ट्र के कोरोना अस्पताल की तरह ही आग से झुलसकर मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों की जान जा सकती है। कहने को तो आग पर काबू पाने के लिए सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डों में विगत तीन वर्ष पूर्व 13 अग्निशमन यंत्र लगाया गया है। गर्मी शुरू होते ही अग्निशमन विभाग द्वारा सदर अस्पताल पहुंचकर पूर्वाभ्यास करके स्वास्थ्य कर्मियों को अग्निशमन यंत्र के जरिए आग बुझने की जानकारी दी जाती है। परंतु सदर अस्पताल के विभिन्न वार्ड में लगे अग्निशमन यंत्र एक्सपायर होकर बेकार हो चुके हैं। सभी अग्निशमन यंत्र सिर्फ दिखावा की वस्तु बनकर रह गई है। मतलब साफ है कि अग्निशमन यंत्र से आग नहीं बुझेगी। ऐसी स्थिति में सदर अस्पताल में आग लग पर मरीजों, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा भगवान ही कर सकेंगे।

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आग लगने पर मरीजों की जान बचाना होगा मुश्किल

सदर अस्पताल में ग्राउंड फ्लोर पर प्रसव कक्ष, इमरजेंसी एवं ओपीडी है। ग्राउंड फ्लोर से निकलने का तीन रास्ता है। जबकि टीबी वार्ड से निकलने का दो रास्ता एवं एसएनसीयू से निकलने का एक रास्ता है। फ‌र्स्ट फ्लोर पर महिला वार्ड, पुरुष वार्ड, कैदी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, आइसोलेशन वार्ड आदि है। जबकि सेकेंड फ्लोर पर पोषण पुनर्वास केंद्र, वृद्ध वार्ड एवं कोरोना का टीकाकरण केंद्र है। जाहिर है कि सदर अस्पताल में आग लगने पर एसएनसीयू में भर्ती नवजात, सेंकेंड फ्लोर पर मौजूद कोरोना मरीज एवं अन्य महिला-पुरूष मरीजों को जान बचाना मुश्किल होगा।

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कोट

सदर अस्पताल में लगे सभी अग्निशमन यंत्र एक्सपायर हैं। आग लगने पर वह यंत्र काम नहीं करेगा। नया अग्निशमन यंत्र तीन वर्ष तक ही कारगर होता है। जबकि रिफिल कराया हुआ अग्निशमन यंत्र एक वर्ष तक कारगर होता है। सदर अस्पताल में लगे अग्निशमन यंत्र तीन वर्ष से अधिक का है। अस्पताल में फायर वॉल या मॉडलर टाइप का अग्निशमन यंत्र लगा रहना चाहिए जो आग लगने पर स्वत: फटकर पाउडर छिड़क कर आग पर काबू पा लेता है। इस संबंध में सदर अस्पताल प्रशासन को कई बार पत्र भेजा जा चुका है।

जोगेंद्र सिंह, फायर ऑफिसर, लखीसराय।

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बोले अस्पताल प्रबंधक

फायर ऑफिसर के पत्र के आलोक में सदर अस्पताल में आग से बचाव के उपाय किए जा रहे हैं। जल्द ही आवश्यक अग्निशमन यंत्र का क्रय करके सदर अस्पताल के विभिन्न जगहों पर लगाया जाएगा।

नंद किशोर भारती, प्रबंधक, सदर अस्पताल, लखीसराय।

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