साइलेंट वोटिग देगा चौंकाने वाला फैसला

किशनगंज। मतदान के आखिरी वक्त तक मतदाताओं की चुप्पी हर राजनीतिक दलों के माथे पर बल ला दिया। आखिरी क्षण तक त्रिकोणीय लड़ाई में फंसी रही किशगनंज विधानसभा सीट पर लड़ाई कांटे की दिखी। जीत किसकी होगी, यह बता पाना राजनीतिक पंडितों के लिए मुश्किल रहा। जहां कार्यकर्ताओं व पार्टी समर्थकों के द्वारा अपने-अपने प्रत्याशियों के जीत का दावा किया जाता रहा वहीं मतदाता आखिरी क्षण तक चुप्पी साधे रहे। पूछने पर भी मतदाता यह कह कर टालते दिखे कि अब 24 अक्टूबर का इंतजार किजिए, सब स्पष्ट हो जाएगा।

शहरी क्षेत्र के मदरसा अंजुमन इस्लामिया मतदान केंद्र हों या फिर बज्मे अदब लाइब्रेरी मतदान केंद्र, मतदाता कुछ भी बोलने से परहेज करते दिखे। मतदान कर घर की ओर लौटते युवा शहनवाज ने पूछने पर इतना ही बताया कि मतदान गुप्त होता है। वैसे भी इसबार बोलना सही नहीं होगा। वहीं सुभाषपल्ली के राहुल कुमार ने बताया कि कोई भी शोर तो सिर्फ प्रत्याशियों के समर्थक कर रहे हैं लेकिन मतदाताओं का नब्ज पकड़ना मुश्किल है। इसी तरह पोठिया के रमेश, अनीश, जहीरूद्दीन समेत अन्य लोगों ने भी आखिरी क्षण तक कुछ भी बताने से परहेज किया।

यही वजह है कि साइलेंट वोटर इस बार उपचुनाव में चौंकाने वाले फैसला दे सकते हैं। अब 24 अक्टूबर को फैसला जो भी आएगा वो एक कीर्तिमान ही बनाएगा। वो इसलिए कि अगर त्रिकोणीय लड़ाई में यह सीट भाजपा के खाते में जाती है तो यह भी कीर्तिमान बनेगा। वजह भी साफ है कि 2015 के सफर में किशनगंज सीट पर भाजपा को जीत नसीब नहीं हो पाया। अगर इस बार जीत मिलती है तो अल्पसंख्यक बाहुल इस सीट पर कमल खिलाकर भाजपा एक कीर्तिमान जरूर बनाएगी। वहीं आखिरी क्षण तक बनी रही कशमकश के बीच अगर कांग्रेस अपनी परंपरागत सीट को जीतने में कामयाब हो जाती है तो यह भी रिकॉर्ड बनेगा। 1962 के बाद यह पहला मौका होगा जब कांग्रेस को लगातार तीसरी बार जीत मिलेगी। यानी 58 साल बाद कांग्रेस लगातार तीसरी जीत दर्ज करेगी। वहीं पूरे दमखम के साथ मैदान में डटी रही एआइएमआइएम का पलड़ा भी आखिरकार भाड़ी ही रहा। अगर इस चुनाव में एआइएमआइएम प्रत्याशी को जीत मिलती है तो इतिहास बनेगा। 2015 के विधानसभा चुनाव से अल्पसंख्यक बहुल इस इलाके पर नजर जमाए हैदराबाद सांसद असदउद्दीन ओवैसी की पार्टी को न सिर्फ किशनगंज में पहली जीत मिलेगी बल्कि बिहार में भी पहली जीत होगी।

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