शोधार्थियों का समुचित मार्गदर्शन करना शोध निदेशकों का दायित्व: कुलपति

मधेपुरा। बीएन मंडल विवि परिसर में शनिवार को वाणिज्य संकाय की पीजीआरसी की बैठक संपन्न हुई। बैठक में तीन शोधार्थियों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। वहीं चार शोधार्थियों को शोध-प्रबंध जमा करने के लिए अवधि विस्तारण मिला। बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. आरकेपी रमण ने कहा कि उच्च शिक्षा में रिसर्च या शोध की भूमिका सबसे अहम होती है। शोध उच्च शिक्षा के लिए प्राणवायु के समान है। किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की रैंकिग में उसमें शोध की स्थिति का विशेष महत्व है।

JagranSat, 12 Jun 2021 11:52 PM (IST)
शोधार्थियों का समुचित मार्गदर्शन करना शोध निदेशकों का दायित्व: कुलपति

मधेपुरा। बीएन मंडल विवि परिसर में शनिवार को वाणिज्य संकाय की पीजीआरसी की बैठक संपन्न हुई। बैठक में तीन शोधार्थियों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। वहीं, चार शोधार्थियों को शोध-प्रबंध जमा करने के लिए अवधि विस्तारण मिला।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. आरकेपी रमण ने कहा कि उच्च शिक्षा में रिसर्च या शोध की भूमिका सबसे अहम होती है। शोध उच्च शिक्षा के लिए प्राणवायु के समान है। किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की रैंकिग में उसमें शोध की स्थिति का विशेष महत्व है। कुलपति ने कहा कि शोध विश्वविद्यालय का सर्वप्रमुख कार्य है। शोध से ज्ञान के नए क्षितिज प्रकाश में आते हैं। इससे नए ज्ञान का सृजन व ज्ञान का परिष्कारण होता है। अत: हम सबों को मिलकर शोध पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि आज हम शोध की गुणवत्ता के मामले में काफी पीछे है। नए शोधार्थियों की यह जिम्मेदारी है कि वे शोध की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें। सभी शोधार्थियों के लिए यह जरूरी है कि वे निरंतर तत्पर रह कर कार्य किया करें। शोध-निदेशकों का यह दायित्व है कि वे शोधार्थियों का समुचित मार्गदर्शन करें। कुलपति ने कहा कि शोध को गुणवत्तापूर्ण, सामयिक और समाजोपयोगी होना चाहिए। यदि हमारा शोध समाज एवं राष्ट्र की समस्याओं के समाधान में योगदान नहीं देगा, तो उसका कोई मूल्य नहीं होगा। कुलसचिव डॉ. कपिलदेव प्रसाद ने कहा कि सभी मिलकर विश्वविद्यालय में शोध का माहौल बनाए। जब हम शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे, तो हमें नैक मूल्यांकन में भी अच्छा ग्रेड मिलेगा। बैठक में वाणिज्य संकायाध्यक्ष डॉ. लंबोदर झा, स्नातकोत्तर वाणिज्य विभाग, मधेपुरा के डॉ. प्रभुनाथ सिंह, एसएनआरकेएस कॉलेज, सहरसा के डॉ. सुनील कुमार व डॉ. महेश कुमार तथा बीएनएमभी कॉलेज, मधेपुरा के डॉ. अशोक कुमार, कुलसचिव डॉ. कपिलदेव प्रसाद, निदेशक अकादमिक डॉ. एमआइ एहसान व उपकुलसचिव अकादमिक डॉ. सुधांशु शेखर उपस्थित थे।

शिक्षक आदर्श कायम करें : प्रति कुलपति प्रति कुलपति प्रोफेसर डॉ. आभा सिंह ने कहा कि शिक्षकों का यह दायित्व है कि वे समाज में एक उच्च मानदंड एवं आदर्श कायम करें। वे वैसी परंपरा को छोड़ें, जिसका अगली पीढ़ी अनुसरण करे। यह बात शोध के क्षेत्र में भी लागू होती है। हम वैसा शोध करें, जिससे हमारे विश्वविद्यालय और राज्य का नाम रोशन हो। उन्होंने कहा कि शोध-निदेशक पीएचडी से संबंधित नियम-परिनियमों की समुचित जानकारी रखें और शोधार्थियों को भी उसकी जानकारी दें। सभी संकायाध्यक्षों एवं विभागाध्यक्षों की यह जिम्मेदारी है कि वे पीएचडी से संबंधित सभी नियमों-परिनियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराएं।

पीजीआरसी की बैठक में सात प्रस्ताव पारित बैठक में मुख्य विभागीय शोध परिषद् द्वारा अनुशंसित व संकायाध्यक्ष द्वारा अनुमोदित पीएचडी शोध से संबंधित कुल सात प्रस्तावों पर चर्चा हुई और सभी प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें तीन नए शोधार्थियों के शोध प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसमें संदीप कुमार, ब्रज भूषण कुमार व सीमा शामिल है। इनके विषय क्रमश: विषय स्टडी ऑफ फाइनेंशियल इंटरमीडिएटेशन थ्रो कॉमर्सियल बैंक, बिहार में नवार्ड का कृषि व ग्रामीण विकास में योगदान व इफेक्टिवनेश ऑफ माइक्रो फाइनेंश इन सस्टेनेबल रूरल डेवलपमेंट है। तीनों के शोध निदेशक वाणिज्य विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रभुनाथ सिंह हैं। इन सभी शोधार्थियों का नवंबर, 2019 से पीएचडी कोर्स वर्क में नामांकन हुआ था। चार शोधार्थियों शैलेंद्र कुमार, नीतीश कुमार, विकास कुमार व राजीव कुमार के शोध प्रबंध जमा करने के लिए अवधि विस्तारण के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

विवि में तीन दिनों तक होगी बैठक

डॉ. शेखर ने बताया कि सोमवार को सामाजिक विज्ञान संकाय (इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान, गृह विज्ञान), मंगलवार को मानविकी संकाय (दर्शनशास्त्र, हिदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, मैथिली) व बुधवार को विज्ञान संकाय (वनस्पति विज्ञान, जंतु विज्ञान, भौतिकी, रसायनशास्त्र, गणित) की बैठक सुनिश्चित है। मालूम हो कि कुलपति प्रोफेसर डॉ. आरकेपी रमण लगातार विश्वविद्यालय के शैक्षणिक उन्नयन के लिए और विशेष रूप से शोध को गति देने के लिए प्रयासरत है। उनके निदेशानुसार विश्वविद्यालय में कोरोना संक्रमण के मद्देनजर जारी लॉकडाउन में भी छात्रहित से जुड़े कार्यों को ससमय पूरा करने का प्रयास किया गया और लगातार छात्रहित में निर्णय लिए जा रहे हैं। इस कड़ी में लंबे समय से प्रतिक्षित पीजीआरसी की बैठक का विशेष महत्व है।

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