रेडक्रॉस चला रहा है जागरूकता अभियान

रेडक्रॉस चला रहा है जागरूकता अभियान

किशनगंज। कोरोना वायरस महामारी के इस दौर में लोगों को जागरूक करने के साथ मदद पहुंचाने

JagranSun, 09 May 2021 12:22 AM (IST)

किशनगंज। कोरोना वायरस महामारी के इस दौर में लोगों को जागरूक करने के साथ मदद पहुंचाने में रेडक्रॉस लगा हुआ है। ऐसे में विश्व रेडक्रॉस दिवस पर इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा अभूतपूर्व कार्य और लोगो को जागरूक करने का फर्ज निभा रहे हैं। रेडक्रॉस के वोलेनटियर्स इस वैश्विक महामारी से बचाव और नियंत्रण के लिये लगातार युद्ध स्तर पर अपनी सेवाएं दे रहा है। कोरोना से संक्रमित मरीजो को दवाई एवं आवश्यक चीजों के लिये होम डिलीवरी किया जा रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण से आमजनों के बचाव एवं जागरूकता को लेकर हैंड पंपलेट ओर फेश मास्क एवं वैक्सीन लगाने को लेकर अभियान चलाया जा रहा है इस कार्य में मुख्य रूप से सचिव मिक्की साहा, सुमित साह, इंद्रजीत कुमार, सत्यम साह, कौशल कुमार, सौरभ कुमार और रंजीत सिंह सहित कई युवक मौजूद रहें। अधिकारी लगातार कर रहे गश्त किशनगंज। लॉकडाउन को प्रभावी बनाने को लेकर प्रशासनिक अधिकारी काफी सक्रिय हैं। क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में बीडीओ, सीओ व थानाध्यक्ष लगातार दौरा कर लोगों को लॉकडाउन का पूर्ण रूप से पालन करने को लेकर अपील कर रहे हैं। वहीं शनिवार को बीडीओ सिकंदर आलम, सीओ खालिद हसन और थानाध्यक्ष सुमन कुमार सिंह ने प्रखंड क्षेत्र के मस्तान चौक, रहमतपाड़ा, अलता कमलपुर,भवानीगंज, मौधो, सोन्था एवं बरबट्टा हाट पहुंच कर विधि व्यवस्था का जायजा लिए। लोगों को कोविड गाइडलाइन के प्रति जागरूक करते हुए घरों पर ही रहने, मास्क का प्रयोग करने एवं भीड़भाड़ से बचने का आह्वान किया।

रहमत और बरकत का महीना है रमजान

किशनगंज। टेढागाछ फुलवारी जमा मस्जिद के इमाम जफर इमाम ने बताया कि रमजान का असल मकसद सब्र, तकवा, हमदर्दी, नरमी, मोहब्बत और इंसान की सेवा करना है। इस बार भी कोरोना संक्रमण के चलते यह बेहद जरूरी है कि हम और भी सब्र से काम लें और बीमारी से बचने के तमाम तरीकों को अपने जीवन में अपनाएं। रमजान रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है। इबादत कर सभी तरह के गुनाहों को माफ कर दिए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि रमजान में रोजेदार की दुआ कभी खाली नहीं जाती है। रोजे रखना इस्लाम का तीसरा सबसे बड़ा फर्ज है। रमजान में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। रमजान का पहला हिस्सा माह के एक से दस दिन का रहमत, दूसरा हिस्सा ग्यारह से बीस दिन का मगफिरत और तीसरा हिस्सा 21 से 30 दिन का दोजख से आजादी का है। रमजान में बेहिसाब बरकत और रहमतों वाली एक रात होती है। जिसे शबे कद्र कहते हैं। यह रात दूसरी रातों से बेहतर होती है। रमजान में कुरान पाक नाजिल किया गया। रमजान में रोजे फर्ज किए गए हैं। तरावीह को सुन्नत करार दिया गया है। माह में हर नेकी का सवाब सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है। रमजान में गरीबों का विशेष ख्याल रखें। इबादत सबसे अधिक करे, जो व्यक्ति माह में रोजेदार को इफ्तार कराता है। उसके सारे गुनाह माफ हो जाते हैं।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.