top menutop menutop menu

गरीबी की गोद से आरती ने भरी सपनों की उड़ान

खगड़िया। गरीबी के बीच पली बढ़ी। मां-बाप के कष्ट और संघर्ष को आरती ने बचपन से ही देखा। दुख-दर्द सहकर भी हिम्मत नहीं हारी। फुटपाथ के किनारे जिला परिषद की जमीन पर झोपड़ी में रहने के बावजूद आरती ने सपनों की उड़ान भरी। फुटबॉल से जुड़ने के बाद उसके जीवन में पंख लग गए। आज वह बिहार पुलिस में कार्यरत है। आज वह अपने परिवार का संबल है। मां-पिता और समाज को अपनी आरती बिटिया पर गर्व है। पिता का प्यार और मां का स्नेह उसकी हिम्मत को बनाए रखा।

मानसी फुटबॉल की नर्सरी है। इस नर्सरी में एक से बढ़कर एक फुटबॉलर के रूप में फूल खिलते रहे हैं, जिनमें एक फूल आरती भी है। आरती के पिता फुटपाथ पर चाय बेचकर बेटी को फुटबॉल से जोड़ने का काम किया। छोटी उम्र में ही आरती मानसी महिला फुटबॉल टीम से जुड़ी और देखते ही देखते टीम की 'रीढ़' बन गई। आज इस 'बिटिया' पर सभी को गर्व है।

मानसी-चकहुसैनी निवासी संतोष गुप्ता फुटपाथ किनारे चाय बेचते हैं। इस कार्य में उन्हें पत्नी रुकमनी देवी भी सहयोग करती हैं, लेकिन संतोष गुप्ता और रुकमनी देवी ने अपनी आरती बिटिया को संस्कार देने का काम किया। आज आरती फुटबॉल से बिहार पुलिस में है। वर्तमान में बेगूसराय में नियुक्त हैं।

आरती कहती हैं, जब छोटी थी, तभी फुटबॉल से जुड़ी। माता-पिता पढ़ाई के साथ-साथ फुटबॉल खेलने के लिए प्रेरित करते रहते थे। उन्हीं का आशीर्वाद और स्नेह है कि बिहार जूनियर और सीनियर टीम का हिस्सा बनीं। पढ़ाई के साथ-साथ फुटबॉल ने आगे बढ़ने का मौका दिया। जिससे आज बिहार पुलिस में सेवा करने का मौका मिला। आरती की छोटी बहन अंजली कुमारी भी फुटबॉल से जुड़ी हुई हैं। आरती कहती हैं, अंजली को बेहतर फुटबॉलर बनाना लक्ष्य हैं। वे कहती हैं, अगर आज फुटबॉल खेल से नहीं जुड़ती तो पुलिस सेवा में नहीं जा पाती। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ- साथ खेल जारी रखूंगी।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.