कम नहीं हुई है किनारे के लोग की व्यथा

खगड़िया। जिला मुख्यालय खगड़िया से 50 किलोमीटर और प्रखंड मुख्यालय बेलदौर से चार किलोमीटर क

JagranFri, 24 Sep 2021 09:08 PM (IST)
कम नहीं हुई है 'किनारे के लोग' की व्यथा

खगड़िया। जिला मुख्यालय खगड़िया से 50 किलोमीटर और प्रखंड मुख्यालय बेलदौर से चार किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है पचौत पंचायत। यह पंचायत प्रसिद्ध साहित्यकार शालिग्राम की पंचायत है। जिन्होंने 'किनारे के लोग' जैसी महत्वपूर्ण रचना रची है। यह उपन्यास कोसी किनारे के लोगों की व्यथा कथा कहती है। शालिग्राम दशकों यहां के मुखिया भी रहे। अभी दिल्ली में रहकर साहित्य साधना में लीन हैं।

अभी भी यह पंचायत 'किनारे' पर ही है। विकास के दावे यहां गुम हो जाते हैं। शायद, इसलिए शालिग्राम को 'किनारे के लोग' लिखना पड़ा। पंचायत की प्रमुख समस्याओं में हर साल आने वाली बाढ़ है। कृषि योग्य

भूमि में जल जमाव है। जिससे खेती-किसानी दिनोंदिन मुश्किल होता जा रहा है। आवागमन की समस्या भी है। अभी भी यहां के लोग भरना कटिग को नाव के सहारे पार करने को विवश हैं।

ग्राम पंचायत पचौत एक नजर में

आबादी: 15 हजार

मतदाता : 75 सौ

वार्ड : 12

आंगनबाड़ी केंद्र: 12

कृषि योग्य भूमि: एक हजार हेक्टेयर

पंचायत में गांव: चार गांव हैं। ये गांव हैं- पचौत, मुरली, पचौत पुनर्वास एवं भरना

मुख्य रोजगार: कृषि व पशुपालन

मुख्य समस्या : जल जमाव

साक्षरता दर : 50 प्रतिशत

विद्यालय: छह

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20 रुपये भाड़ा देकर पार करते हैं भरना कटिग

संवाद सूत्र, बेलदौर(खगड़िया): पचौत पंचायत में सड़कों का हाल बेहाल है। यहां के लोगों को साल भर आवागमन की समस्या का सामना करना पड़ता है। पंचायत मुख्यालय पचौत गांव को बेलदौर- पचौत पथ जोड़ती है। पंचायत की पचौत पुनर्वास- मुरली दिघौन तीन किलोमीटर लंबी सड़क जर्जरता की सीमा को पार कर गई है। यह कीचड़ से लबालब है। वर्ष 2002 में तत्कालीन सांसद डा. आरके राणा ने उक्त सड़क निर्माण कार्य आरंभ कराया, लेकिन संवेदक पथ को आधा अधूरा छोड़ कर फरार हो गया। एक वर्ष पूर्व सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल गोगरी द्वारा डीपीआर तैयार कर भेजा गया। परंतु, सामने आया कि उस दौरान कार्य खगड़िया डिविजन की ओर से कराया गया था। पथ का दस्तावेज ही गुम हो गया है। जिससे सड़क निर्माण अधर में लटका हुआ है। मुरली महादलित टोला से धोबियाही की ओर जाने वाली सड़क अर्धनिर्मित रहने से मुरली महादलित टोला का आवागमन बीते चार माह से बाधित है। पथ निर्माण कछुए गति से जारी है। भरना गांव को जोड़ने वाली बेलदौर- बारुण पथ के भरना कटिग में निर्धारित समयावधि बीत जाने बाद भी आरसीसी पुल नहीं बन पाया है। अंचल प्रशासन द्वारा चलाई जा रही नाव पांच दिनों पूर्व बंद कर दिया गया। अब पोषक क्षेत्र के लोग निजी नाव के सहारे 20 रुपये चुकता करने के बाद कटिग को आर-पार करने के लिए विवश बने हुए हैं। चार पहिया वाहन चालकों को चोढ़ली, उसराहा जाने के लिए अतिरिक्त 15 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ रहा है।

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बीमार पड़ने पर ग्रामीण चिकित्सक का ही सहारा

कहने को पंचायत में एक उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। लेकिन इसका संचालन कागजों पर ही वर्षों से किया जा रहा है। पंचायत वासी बीमार पड़ने पर ग्रामीण चिकित्सक के भरोसे इलाज कराते हैं। शुद्ध पेयजल की बात करें तो सभी 12 वार्डों में मिनी जलमीनार खड़ी है। लेकिन इनमें से वार्ड संख्या एक से चार एवं आठ, कुल पांच वार्डों में ही पानी आपूर्ति शुरू हो सका है। शेष सात वार्ड के लोग आयरन युक्त पानी पीने को विवश बने हुए हैं। 12 आंगनबाड़ी केंद्रों में से दो को ही अपना भवन है।

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चार सौ हेक्टेयर में जल जमाव संवाद सूत्र, बेलदौर, (खगड़िया): पचौत पंचायत बाढ़ प्रभावित पंचायतों में शुमार है। कोसी की बाढ़ से पंचायत हर वर्ष प्रभावित होती है। लगभग 90 प्रतिशत लोगों की जीविकोपार्जन का साधन खेती-पशुपालन है। पंचायत की किसान मक्का की खेती प्रमुखता से करते हैं। लेकिन अभी भी करीब चार सौ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में जल जमाव है। ऐसे में किसानों को समय पर खेती करने में परेशानी होती है। किसानों ने जल जमाव की समस्या से निजात दिलाने की मांग कई बार की है, परंतु परिणाम शून्य ही निकला है। किसानों का कहना है कि अगर इस समस्या का समाधान हो जाए, तो उनकी कोठी मक्का से भर जाएगी।

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