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स्वतंत्रता सेनानी धनिकलाल को गर्व है, आज 74वां स्वतंत्रता दिवस मना सकेंगे

खगड़िया। 15 अगस्त 1947 को भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिली। उस दिन को कभी नहीं भूला जा सकता है। भारतवासियों का वर्षों का सपना पूरा हुआ था। लोग आजादी मिलने की बात से इतने खुश थे कि चीख- चीखकर खुशियां मना रहे थे। ऐसा लगता था कि दिल पर से एक बड़ा बोझ उतरा हो। यह कहना है पसरहा के वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी धनिकलाल मंडल का। ये आज भी उस दिन को याद कर हर्षित हो जाते हैं। देश के राष्ट्रपति से इस वर्ष सम्मानित होने वाले देश के 202 स्वतंत्रता सेनानी में ये भी शामिल हैं। कोरोना संक्रमण को लेकर एट होम कार्यक्रम के तहत भारत छोड़ो आंदोलन में सहयोग के लिए इन्हें बीते नौ अगस्त को राष्ट्रपति की ओर से डीडीसी द्वारा सम्मानित किया गया। स्वतंत्रता सेनानी धनिकलाल मंडल के अनुसार आज आजाद भारत में लोगों को देखकर खुशी मिलती है। उन्होंने कहा कि जिस समय अंग्रेजों ने भारत देश को गुलाम बना रखा था, उस समय एक व्याकुलता मन में रहती थी। देशवासियों ने आजादी के लिए लगातार प्रयास किया। उस समय वे युवा थे। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध आंदोलन में जाने से वे रोक नहीं पाए और लगातार आंदोलन में शामिल रहे। आज देश आजाद है। काफी खुशी मिलती है। उन्हें यह गर्व है कि आज वे 74वां स्वतंत्रता दिवस मना सकेंगे।

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