आन द स्पाट: यहां बच्चे ही विद्यालय का गेट खोलते हैं और वर्ग कक्ष में झाड़ू लगाते हैं

संवाद सूत्र गोगरी (खगड़िया) जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था का हाल दिन-प्रतिदिन दयनीय होता जा

JagranTue, 07 Dec 2021 11:46 PM (IST)
आन द स्पाट: यहां बच्चे ही विद्यालय का गेट खोलते हैं और वर्ग कक्ष में झाड़ू लगाते हैं

संवाद सूत्र, गोगरी (खगड़िया): जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था का हाल दिन-प्रतिदिन दयनीय होता जा रहा है। मंगलवार को जागरण टीम ने गोगरी प्रखंड के विद्यालय की पड़ताल की, तो कई खामियां सामने आई। ये गुणवत्ता व बेहतर शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रही थी।

जागरण की टीम सुबह के आठ बजे गोगरी बाजार स्थित तारा मध्य विद्यालय पहुंची। विद्यालय खुलने का समय नौ बजे है। गेट बंद होने के कारण टीम बाहर खड़ी होकर विद्यालय खुलने का इंतजार कर रही थी। 8:43 बजे के करीब से विद्यालय के गेट पर विद्यार्थियों का पहुंचना आरंभ हुआ। तब तक आठ- 10 की संख्या में विद्यार्थी गेट पर जमा हो चुके थे। 8:48 बजे के करीब नियोजित नगर शिक्षक राजू कुमार रजक वहां पहुंचे। इनका घर विद्यालय के करीब है। वे घर से चावी लाए और विद्यार्थी को चावी देकर गेट खुलवाया। विद्यालय का गेट खुलने के बाद पहले विद्यालय का जायजा लिया गया। विद्यालय में सर्वत्र गंदगी फैली हुई थी। विद्यालय पहुंचे पहली और दूसरे वर्ग के कुछ बच्चे खुद से झाड़ू लगाने लगे और अपने वर्ग कक्ष की सफाई करने लगे। पहले व दूसरे वर्ग के बच्चे फर्श पर अपना स्थान लेकर बैठने लगे थे। यहां के प्रधानाध्यापक पंचायत चुनाव की ड्यूटी को लेकर लगभग दो माह से विद्यालय नहीं आ रहे हैं। 9:18 बजे विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मीणा कुमारी विद्यालय में प्रवेश की। इस बीच बच्चों का आना जारी था। 9:30 बजने पर प्रभारी प्रधानाध्यापक ने बच्चों का प्रार्थना सत्र आरंभ करवाया। प्रार्थना सत्र के बीच में ही एक और शिक्षिका सुचित्रा कुमारी 9:36 बजे विद्यालय में प्रवेश करने के साथ प्रार्थना में शामिल हो जाती हैं। प्रार्थना के बाद सभी बच्चे अपने अपने वर्ग में चले गए। और शिक्षकों के आने का इंतजार करते हुए टीम वर्ग कक्ष का जायजा लेने लगी। जिसमें वर्ग एक से लेकर चार तक के बच्चे फर्श पर बैठे दिखे। ठंड में फर्श पर बैठना बच्चों के लिए परेशानी का सबब है। बच्चों ने बताया कि फर्श पर बैठने से उन्हें ठंड लगता है। कुछेक बच्चों ने बताया कि वे घर से बोरी लेकर आते हैं। वर्ग पांच से आठ तक के लिए बैंच डेस्क की व्यवस्था थी। जो पुराने व टूटे- फूटे दिखे। विद्यालय में शौचालय की दयनीय स्थिति दिखी। शौचालय के एक रूम में टूटा हुआ बेंच और डेस्क इकठ्ठा पड़ा हुआ था। बच्चों के पीने के लिए चापाकल का ही पानी था। जबकि शिक्षकों को पीने के लिए बाहर से डब्बे वाले पानी की व्यवस्था की गई थी। यहां का कंप्यूटर रूम बंद पड़ा था। पठन-पाठन का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि सातवें और आठवें के बच्चों से बिहार के राज्यपाल कौन हैं, पूछा गया, तो किसी ने जवाब नहीं दिया। फिर भारत के राष्ट्रपति का नाम पूछा गया, तो बच्चे जवाब नहीं दे सके। तब शिक्षक राजू कुमार रजक ने इन सवालों का जवाब बच्चों को बताया। इस दौरान 10:30 बजे तक कोई शिक्षक विद्यालय नहीं पहुंचे थे। इस बाबत प्रभारी प्रधानाध्यापक मीणा कुमारी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि विद्यालय में कुल 10 शिक्षक हैं। जिनमें चार शिक्षक चुनाव ड्यूटी में हैं। एक शिक्षक सीएल पर हैं। तीन शिक्षक मौजूद हैं। शेष दो और शिक्षक आते होंगे। विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति काफी कम थी। प्रभारी प्रधानाध्यापक ने पूछने पर बताया कि यहां कुल 1201 छात्र- छात्राएं नामांकित हैं। जिनमें छात्राओं की संख्या 609 और छात्रों की संख्या 592 है। जबकि उपस्थिति 11 बजे तक करीब चार सौ की थी। तब तक वर्ग शिक्षक बच्चों की उपस्थिति नहीं ले सके थे। हां, दो शिक्षक वर्ग कक्ष में अवश्य चले गए थे। खबर का बाक्स

वर्ग सात के छात्र ने कहा: भारत के राष्ट्रपति सरदार बल्लभ भाई पटेल

वर्ग सप्तम के सुमित कुमार को बिहार के राज्यपाल का नाम नहीं मालूम था। जबकि राष्ट्रपति का नाम उसने सरदार बल्लभ भाई पटेल बताया। वर्ग अष्ठम की रुणा कुमारी ने राज्यपाल का नाम भूल गए कहकर टाल दिया। वर्ग अष्टम के ही रुचि कुमारी ने स्पष्ट कहा कि राज्यपाल का नाम नहीं पता। हां, उसने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का नाम बता दिया। वर्ग अष्टम के ही मेहर खातून को राज्यपाल का नाम नहीं पता था। वर्ग अष्टम के लव कुमार ने सम संख्या और विषम संख्या पूछने पर बता दिया। जबकि इस वर्ग की ज्योति कुमारी ने अपने ही वर्ग के वर्गमूल व अभाज्य गुणनखंड के बारे में पूछने पर नहीं बता पाई।

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