बंदोबस्ती का पर्चा नहीं मिलने पर विस्थापितों ने जताया आक्रोश

बंदोबस्ती का पर्चा नहीं मिलने पर विस्थापितों ने जताया आक्रोश

कटिहार। कुरसेला प्रखंड के गांधीग्राम बिद टोली में बसे विस्थापित परिवारों को पांच दशक बाद

Publish Date:Thu, 02 Jul 2020 09:40 PM (IST) Author: Jagran

कटिहार। कुरसेला प्रखंड के गांधीग्राम बिद टोली में बसे विस्थापित परिवारों को पांच दशक बाद भी बासगीत पर्चा नहीं मिल पाया है। इस चलते विस्थापित परिवार कई तरह की सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित है। बासगीत पर्चा नहीं मिलने से इंदिरा आवास, निवास प्रमाण पत्र, तथा जाति प्रमाण पत्र,राशन किरासन और कई सरकारी योजनाओं के लाभ से वे अब तक वंचित हैं। इस कारण छात्र-छात्राओं को जाति, आवासीय प्रमाण पत्र बनाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं ग्राम वासियों को मिल रहे हैं इंदिरा आवास की योजनाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है। मालूम हो कि सन 1968 में प्रलयंकारी बाढ़ में गोबराही दियरा की सैकड़ों एकड़ जमीन सहित आवास भूमि कटकर गंगा कोसी में विलीन हो गया था। गोबराही दियारा के लोगों को सरकार द्वारा जमीन मुहैया कर बिद टोली गाँव में बसाया गया था। तब से आज तक सरकार द्वारा बसाए गए जमीन का इन लोगों को वासगीत पर्चा नहीं मिलने से अस्थाई निवास प्रमाण पत्र प्रखंड कार्यालय से निर्गत किया जाता है। युवाओं को भी सरकारी नौकरी में परेशानी होती है। सरकार द्वारा बसाये गए विस्थापित परिवार में से एक सौ लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना में लोगों के नाम की स्वीकृति होते हुए भी जमीन के कागज नहीं होने के कारण योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस चलते अब उनका आक्रोश छलकने लगा है। समाज सेवी राजन महतो ने बताया कि

पर्चा नहीं रहने से उन लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इस कारण वे लोग झोपड़ी में रहने को विवश हैं। जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय वोट माँगने आते हैं। चुनाव के बाद आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता है। ऐसे परिवारों की संख्या लगभग दो सौ है।

क्या कहते हैं ग्रामीण

ग्रामवासी राजकुमार महतो, देवेंद्र महतो, चमालाल महतो, सतनारायण महतो, राजन महतो, मोहन मंडल, सुदामा मंडल, डोमन मंडल, तारनी मंडल, गोपाली मंडल, राजेंद्र राम, लक्ष्मी शर्मा, अर्जुन शर्मा, गुजो ठाकुर, प्रवीण ठाकुर, मुन्ना ठाकुर, रामनाथ महतो, मटरू महतो ने बताया कि वे लोग हर दर पर दस्तक देकर थक चुके हैं। अगर इस दिशा में सार्थक पहल नहीं हुई तो वे लोग सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे।

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