गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से जारी है कटाव

कटिहार। प्रखंड के दक्षिणी मुरादपुर पंचायत के पत्थर टोला तथा खेरिया में गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव होने से तेजी से कटाव जारी है। पत्थर टोला तथा खेरिया के किसानों की सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन कटाव की चपेट में आने से किसान भयभीत है।

JagranWed, 28 Jul 2021 11:47 PM (IST)
गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से जारी है कटाव

कटिहार। प्रखंड के दक्षिणी मुरादपुर पंचायत के पत्थर टोला तथा खेरिया में गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव होने से तेजी से कटाव जारी है। पत्थर टोला तथा खेरिया के किसानों की सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन कटाव की चपेट में आने से किसान भयभीत है। तेजी से हो रहे कटाव को लेकर पिछले सप्ताह डीएम उदयन मिश्रा ने कटाव स्थल के पत्थर टोला तथा खेरिया का जायजा लिया था। उनके साथ बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने तेजी हो रहे कटाव को देखते हुए अधिकारियों को जल्द से जल्द कटाव विरोधी कार्य शुरू कराने का निर्देश दिया था। लेकिन संवेदक की लापरवाही के कारण कटाव निरोधी सिर्फ कागजों पर ही रह गया। सिर्फ कहीं-कहीं बांस देकर खानापूर्ति कर दी गयी। जबकि डीएम ने संवेदक को चार दिनों के अंदर कटाव निरोधी कार्य पूरा कराने का निर्देश दिया था। लेकिन समय पर कटाव निरोधी कार्य नहीं होने से अज्जो यादव, सीताराम यादव, विजय यादव, अजय यादव, कुमोद यादव, पंकज यादव समेत बड़ी संख्या में किसानों ने प्रशासन पर नाराजगी जतायी है। कहा कि कटाव निरोधी कार्य सही तरीके से नहीं किया गया। जबकि किसानों की सैकड़ों एकड उपजाऊ जमीन कटाव की चपेट में आ चुकी है। जबकि पांच वर्षों से उपजाऊ जमीन को बचाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया था।

उंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैँ पशुपालक

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विगत दो दिनों से गंगा एवं कोसी नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के कारण कुरसेला प्रखंड के कई पंचायत के निचले इलाकों में पानी फैलते ही पशुपालक पशुओं के साथ ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं। दोनों नदियों के जलस्तर में अचानक तेजी आने से क्षेत्र में बाढ़ की संभावना बढ़ गई है। ग्रामीणों को भय सताने लगा है। वे सुरक्षित ठिकाने की तलाश में लग गए हैं। दो दिनों से गंगा-कोसी में पानी बढ़ रहा है। इसके कारण बालू टोला, पत्थर टोला, मलिनिया, चाय टोला, खेरिया, बाघमारा, पंचकुटी गांव के निचले बहियार में नदी का पानी प्रवेश करने लगा है। ग्रामीण रेलवे लाइन, बांध, सड़क पर मवेशी को लेकर पलायन करने को मजबूर है। निचले इलाके मे बाढ़ का पानी फैलने से मवेशियों के लिए चारे की किल्लत हो गई है। कई पशुपालकों ने बताया कि लगातार दो दिनों से नदी में पानी बढ़ रहा है। बाघमारा, पंचखुटी में बाढ़ पानी के निचले इलाके में फैल जाने से टापू में तब्दील चुका है। बाघमारा के किसान डूबी हुई फसल को काटकर एनएच 31 के किनारे लाते हैं। वहीं तैयार कर सड़क पर सुखाने को मजबूर है। ग्रामीणों को हाट बाजार आने जाने के लिए नाव ही एक मात्र सहारा है। किसान भदई फसल को लेकर चितित है। नदियों के जलस्तर में वृद्धि से तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है। नदियों के आसपास के तटीय भाग पर सैकड़ों एकड़ में लगी परवल, करेला की खेती डूब कर बर्बाद हो चुकी है। दियारा क्षेत्र में निवास करने वालों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। नदियों के प्रवाह दायरे में विस्तार होने से दियरा के लोगों को आवागमन में परेशानी बढ़ती जा रही है। गोबराही दियारा के पशुपालक मंटू यादव, पंकज यादव, माधो मंडल, सुनील यादव, उपेंद्र यादव, शीतल यादव ने बताया कि गोबराही दियारा में पानी फैल जाने के कारण पशुपालक उंची स्थान पर पशुओं को लेकर पलायन कर रहे हैं।

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