कैमूर में मनमाने तरीके से सीडीपीओ कार्यालय चला रहे पदाधिकारी व कर्मी

रामपुर प्रखंड के सीडीपीओ कार्यालय में कर्मियों के लेट लतीफ आने की बात अक्सर सामने आ रही थी।

JagranWed, 25 Aug 2021 11:10 PM (IST)
कैमूर में मनमाने तरीके से सीडीपीओ कार्यालय चला रहे पदाधिकारी व कर्मी

कैमूर। रामपुर प्रखंड के सीडीपीओ कार्यालय में कर्मियों के लेट लतीफ आने की बात अक्सर सामने आ रही थी। प्रखंड के लोगों के बीच इस कार्यालय पर तरह-तरह का आरोप लगाया जा रहा था। इस बात की हकीकत का पता लगाने के लिए बुधवार को जागरण टीम ने आन द स्पाट किया। जिसमें लोगों की शिकायत सच ही मिली। पड़ताल के दौरान कार्यालय की जो व्यवस्था दिखी वह आश्चर्य करने वाली थी। कार्यालय खुलने का समय दस बजे है। लेकिन कार्यालय में 10:15 मिनट पर एक सफाई कर्मी व प्रधान लिपिक मौजूद थे। इसके बाद 10:35 मिनट पर एक कर्मी बीपीए पहुंचे। लेकिन काम नहीं शुरू हुआ। जो कर्मी आए वो काम करने की बजाय अपने मोबाइल में लग गए और कुर्सी पर ऐसे बैठे रहे जैसे अपने घर में बैठे हों। इसके बाद 10:45 मिनट पर एक सेविका अपने सेंटर में चोरी होने की शिकायत करने पहुंची। लेकिन सीडीपीओ अब तक नहीं पहुंची थी। सीडीपीओ करीब 11 बजे अपने कार्यालय में पहुंची। लेकिन तीन सुपरवाइजर सहित अन्य कर्मी साढ़े 11 बजे तक कार्यालय में नहीं पहुंची थी। सीडीपीओ करीब 11 बजे कार्यालय पहुंचे। हालांकि आते ही वे अपना काम संभाल ली। लेकिन अन्य कर्मियों के आने की जानकारी उन्होंने लेना मुनासिब नहीं समझा।

फर्श पर बिखरे हैं कागजात:

सीडीपीओ कर्यालय आंगनबाडी केंद्र का सबसे अहम कार्यालय माना जाता है। यहां एक-एक कागजात का काफी महत्व है। लेकिन आश्चर्य है कि कई संचिकाएं और कागजात कक्षों में फर्श पर बिखरे पड़े हैं। कर्मी कुर्सी डटाए रहते हैं और लोग स्वयं अपने कागजात खोजते हैं। ऐसे में यहां से अकसर कागजात गायब होने की शिकायतें मिलती रहती हैं। बता दें कि कुडारी पंचायत के वार्ड सदस्य मोलू पासवान ने बताया कि हम आज एक माह से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दौड़ रहे हैं। लेकिन आज तक मेरा मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन पाया। उल्लेखनीय है कि रामपुर सीडीपीओ भगवानपुर की सीडीपीओ हैं। जो रामपुर के प्रभार में है। लेकिन आज तक उनके यहां आने की तिथि भी बोर्ड पर नही निर्धारित की गई है कि किस तिथि को वह रामपुर में आती है। वर्ष 2006 से 2008 तक प्रभार में सीडीपीओ का पद था। 2008 से 2011 तक यहां सीडीपीओ ने योगदान किया। इसके बाद पुन: यह पद प्रभार में चल रहा है।

बिना रिश्वत के नहीं होता काम:

नाम नहीं छापने की शर्त पर कई आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका बताती है कि महिला पर्यवेक्षिका एवं बाल विकास परियोजना पदाधिकारी एवं बिचौलियों की मिलीभगत से खुब धनउगाही हो रही है। राशि नहीं देने पर केंद्र से संबंधित विभिन्न कागजातों में उलझाकर एवं वरीय पदाधिकारी का डर दिखाकर वसूली की जाती है। यह डर दिखाया जाता है कि अगर आपलोग एक माह में चार हजार रुपये नहीं देंगी तो आपको चयन मुक्त कर दिया जाएगा। वहीं पर्यवेक्षिका की मनमानी का आलम यह है की कभी-कभी तो केंद्रों पर सेविकाओं से तीखी बहस भी हो जाती है।

डीएम के आने का भी नहीं दिखा डर-

बुधवार को रामपुर प्रखंड कार्यालय का निरीक्षण करने डीएम नवदीप शुक्ला को आना था। इसकी सूचना से प्रखंड सह अंचल कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों में कर्मी कार्यालय खुलने के निर्धारित समय से ही मौजूद थे। कार्यालयों की सफाई ऐसी हुई कि कहीं कुछ गड़बड़ी न डीएम को दिखे। लेकिन सीडीपीओ कार्यालय के पदाधिकारी व कर्मी में डीएम के आने का कोई डर नहीं दिखा।

क्या कहती हैं सीडीपीओ:

इस संबंध में प्रभारी सीडीपीओ अंजू कुमारी ने बताया कि उन्हें इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर कहीं गड़बड़ी हो रही है तो उनसे शिकायत कर सकते हैं। जांच कर दोषी पर कार्रवाई की जाएगी। जहां तक राशि वसूलने की बात है यह गलत है।

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