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फूल की खेती से युवाओं को रोजगार की राह दिखा रहे गुड्डू

कैमूर। आज के आधुनिक दौर में खेतीबारी से नई पीढ़ी दूर भागती जा रही है। रोजगार के लिए युवाओं का पलायन जारी है। विकास का दावा करने वाली सरकारें अब तक कैमूर जिले में एक अच्छी फैक्ट्री की स्थापना तक नहीं करा सकी। जिला प्रशासन के सहयोग से कुछ युवा लघु उद्योग कर किसी तरह जीविकोपार्जन कर रहे हैं। ऐसे में खेतीबाड़ी से स्वयं को आत्मनिर्भर बनाते हुए अन्य युवाओं को रोजगार की राह दिखाना काफी मायने रखता है। यह कार्य कैमूर जिले के रामपुर प्रखंड अंतर्गत बड़कागांव गांव निवासी युवा किसान गुड्डू कर रहे हैं। फूल की खेती कर गुड्डू का परिवार आज खुशहाल और आर्थिक स्थिति से संपन्न हो चुका है। खेतों में फूलों की खुशबू और सुंदरता ने उस बधार की सुंदरता में ही चार चांद लगा दिया है। गुड्डू को फूल की खेती से आत्मनिर्भर बनते देख गांव के युवा फूल की खेती करने के प्रति आकर्षित हुए हैं। इसमें कुछ युवा गुड्डू के पास पहुंच फूल की खेती के बारे में जानकारी लेते हैं। उन युवाओं को गुड्डू अपने साथ रख फूल के व्यवसाय में सहयोग भी लेते हैं। शादी-विवाह सहित अन्य अवसर विशेष पर फूल का व्यवसाय करने में गुड्डू का सहयोग करने वाले युवाओं की भी अच्छी कमाई हो जाती है। गांव के लगभग 30-40 युवा गुड्डू के साथ फूल के व्यवसाय में लगे हुए हैं। नकदी पर खेत लेकर करते हैं फूल की खेती :

गुड्डू अपने गांव में प्रति वर्ष नकदी पर खेत लेकर फूल की खेती कर रहे हैं। लगभग 30 डिसमिल भूमि में फूल की खेती प्रत्येक वर्ष कर रहें हैं। उन्होंने बताया कि फूल का व्यवसाय पूर्वजों के समय से ही है। लेकिन तब खेती नहीं होती थी। उस समय अन्य जिलों से फूल मंगा कर उसका व्यवसाय किया जाता था। उसमें बहुत अच्छी आमदनी नहीं होती थी। तब मन में फूल की खेती करने की जिज्ञासा उठी और नकदी पर खेत लेकर फूल की खेती की। इससे अच्छी आमदनी हुई। उन्होंने बताया कि उनके खेत का फूल कैमूर, रोहतास सहित आसपास के जिला के कई बाजारों में पहुंच रहा है। गेंदा का फूल की स्थानीय बाजार में वैवाहिक कार्यक्रमों में खूब मांग रहती है। पहले किलोग्राम के हिसाब से फूल बिकते थे। लेकिन अब गूंथी गई लड़ियों के कुड़ी के हिसाब से बिकता है।

फूल की खेती से 10 कट्ठे में करीब 80 हजार से एक लाख तक की आमदनी होती है। लेकिन उन्हें अफसोस है कि फूल की खेती देखने के लिए कृषि विभाग के पदाधिकारी व कर्मी कई बार आए। लेकिन अब तक कोई सहयोग नहीं मिला।

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