डायरिया व निमोनिया से बच्चों को बचाता है स्तनपान

राज्य में नवजात देखभाल सप्ताह मनाया जा रहा है। आवश्यक नवजात देखभाल में स्तनपान की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। इसको लेकर स्वास्थ्य केंद्रों के साथ सामुदायिक स्तर पर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रसव के बाद नर्स एवं चिकित्सकों द्वारा एक घंटे के भीतर शिशु को स्तनपान सुनिश्चित कराने पर अधिक •ाोर दिया जा रहा है। साथ ही अस्पताल से डिस्चार्ज होने पर माताओं को छह माह तक केवल स्तनपान कराए जाने के विषय में परामर्श दिया जा रहा है।

सिविल सर्जन डा. अरुण कुमार तिवारी ने बताया कि इस नवजात देखभाल सप्ताह के दौरान अधिक से अधिक लोगों को स्तनपान के फायदों से अवगत कराने पर •ाोर दिया जा रहा है। शिशु के लिए एक घंटा के अंदर मॉ का पीला दूध एवं छह माह तक केवल स्तनपान बहुत जरुरी होता है। यदि बच्चे को जन्म के पहले घंटे के अंदर मॉ का पहला पीला गाढ़ा दूध पिलाया जाए तो ऐसे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। स्तनपान शिशु को डायरिया एवं निमोनिया जैसे गंभीर रोगों से भी बचाव करता है। जिससे शिशु के बेहतर पोषण की बुनियाद तैयार होती है। सामुदायिक स्तर पर गर्भवती एवं धातृ माताओं के साथ परिवार के अन्य सदस्यों के बीच स्तनपान को लेकर सकारात्मक माहौल तैयार करने के उद्देश्य से मदर एब्सुलेट अफेक्सन प्रोग्राम ( 'मा' कार्यक्रम) की शुरुआत की गई है। नवजात देखभाल सप्ताह के दौरान इस कार्यक्रम के तहत अधिक से अधिक परिवारों को स्तनपान के बारे में जानकारी दी जा रही है। जिसमें आशा, आंगनबाड़ी एवं एएनएम महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं।

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