कैमूर में वर्षों से बन रहा आंगनबाड़ी केंद्र अभी तक नहीं हो सका पूर्ण

प्रखंड के बड्ढ़ा गांव में पिछले कई वर्षों से आंगनबाड़ी केंद्र बन रहा है।

JagranTue, 08 Jun 2021 04:16 PM (IST)
कैमूर में वर्षों से बन रहा आंगनबाड़ी केंद्र अभी तक नहीं हो सका पूर्ण

कैमूर। प्रखंड के बड्ढ़ा गांव में पिछले कई वर्षों से आंगनबाड़ी केंद्र बन रहा है। लेकिन अभी तक वह पूर्ण नहीं हो सका है। संवेदक का स्थानांतरण हो चुका है और राशि भी निकाली जा चुकी है। ऐसी स्थिति में कोई भी उस कार्य की जवाबदेही लेने को तैयार नहीं है। ऐसी बात नहीं है कि प्रशासनिक अधिकारियों या लोक सेवकों को इस बात की जानकारी नहीं है। अधिकतर लोग जानते हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई भी ठोस पहल नहीं हो सकी है। प्रखंड के बड्ढ़ा गांव में दो आंगनबाड़ी केंद्र संचालित होते हैं। केंद्र नंबर एक की सेविका हैं उत्तमाशा देवी, जबकि केंद्र नंबर दो की सेविका हैं सीमा चतुर्वेदी। आंगनबाड़ी केंद्र के लिए भवन बनाने की पहल नमो नारायण चतुर्वेदी द्वारा की गई। 13 वें वित्त आयोग के मद से करीब छह लाख रुपये से सरकारी विद्यालय के पास भवन निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ।

तत्कालीन अभिकर्ता पंचायत सचिव प्रेम नारायण पांडेय और सुरेंद्र मिश्र थे। जबकि पंचायत समिति सदस्य व उपप्रमुख मंटू ठाकुर थे। इसमें सुरेंद्र मिश्र सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जबकि प्रेम नारायण पांडेय का स्थानांतरण दूसरे प्रखंड में हो चुका है। योजना की कुल राशि में अधिकांश भाग की निकासी हो चुकी है। लेकिन अभी भी भवन पूरी तरह से तैयार नहीं हो सका है। भवन की छत ढाल दी गई है, लेकिन न तो प्लास्टर हुआ है न ही खिड़की लगी है और न ही हैंडपैंप लगा है।

भवन के अभाव में आंगनबाड़ी केंद्र संख्या एक की सेविका उत्तमशा देवी अपना केंद्र अपने दरवाजे पर चलती हैं। जबकि केंद्र संख्या दो की सेविका सीमा चतुर्वेदी अपना केंद्र निर्भय कुमार चतुर्वेदी से किराए पर रूम लेकर चलाती हैं। इतना सब होने के बाद भी कोई इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। सभी लोग यही कहते हैं कि अधिकांश राशि निकली जा चुकी है। लेकिन जवाबदेही एक दूसरे पर डाल देते हैं। तत्कालीन पंचायत समिति सदस्य मंटू ठाकुर से बात करने पर उन्होंने कहा कि अधिकांश राशि निकली जा चुकी है। बीडीओ रमन सिन्हा के संज्ञान में मामला लाने के बाद उन्होंने कहा था कि पंचायत सेवक का जिस प्रखंड में स्थानांतरण हुआ है वहां के बीडीओ के संज्ञान में मामला डाल दिया गया है। शीघ्र ही कोई करवाई होगी। लेकिन इस आश्वासन के काफी समय बीत जाने के बाद भी अभी तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। देखना है कि कब तक सरकारी राशि के गबन करने वालों के गिरेबान तक प्रशासनिक महकमा पहुंचता है और आंगनबाड़ी केंद्रों को अपना खुद का भवन नसीब होता है।

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