जिस माटी से पड़ी चिराग के जीत की बुनियाद वहां भूदेव को मिली बढ़त

जमुई। लोक सभा चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार चिराग पासवान को भले ही बड़ी जीत मिली तथा उस जीत में मोदी की सभा और लहर निर्णायक रही हो लेकिन हकीकत यह भी है कि मोदी ने जिस बल्लोपुर के मैदान से चिराग की जीत की बुनियाद महती सभा में रखी। उस बल्लोपुर के मतदान केन्द्र पर चिराग पिछड़ गए। बल्लोपुर में माई समीकरण का प्रभुत्व है और यहां जो भी मिला वह चिराग और एनडीए के लिए उपलब्धि मानी जा रही है। इधर, महागठबंधन के कद्दावर नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव के बरहट में भी चिराग ने महागठबंधन के प्रत्याशी को कांटे की टक्कर दी है और एक मतदान केन्द्र पर तो चिराग को बढ़त भी मिली है। जय-विजय के गांव बरहट में एक मतदान केन्द्र संख्या 164 पर चिराग को बढ़त भी हासिल हुआ, जबकि दूसरे पर कांटे की टक्कर रही। मतदान केन्द्र संख्या 164 पर चिराग को 248 को तथा भूदेव को 231 मत मिले तथा बूथ नम्बर 163 पर भूदेव 297 वोट लाकर आगे रहे लेकिन चिराग ने भी पीछा नहीं छोड़ा और महज 27 वोट पीछे 270 पर जाकर रुके।

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दोनों क्षत्रप के मतदान केंद्र पर चिराग को मिले एक समान मत :

महागठबंधन के नेता जयप्रकाश नारायण यादव एवं विधायक विजय प्रकाश के मतदान केन्द्र सलैया और एनडीए में रहते हुए विरोध करने वाले कद्दावर नेता पूर्व मंत्री नरेन्द्र सिंह के पकरी स्थित मतदान केंद्र पर चिराग पासवान को प्राप्त वोट एक समान रहा और दोनों जगह 110-110 वोट हासिल हुए। पूर्व मंत्री नरेन्द्र सिंह के गांव भौंड़ में भी चिराग को भूदेव चौधरी से 125 वोट ज्यादा कुल 387 वोट हासिल हुआ। हालांकि, पकरी स्थित मतदान केन्द्र पर लोजपा उम्मीदवार को महज 110 मत से संतोष करना पड़ा। जमुई की राजनीति में बीते तीन दशक से दो धुरी बने नरेंद्र और जयप्रकाश के लिए बड़ा झटका है।

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50 वोट से पिछड़े चिराग :

जमुई विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत बल्लोपुर के मतदान केन्द्र संख्या 228 पर महागठबंधन के प्रत्याशी को मतदाताओं ने बढ़त दिलाते हुए 326 वोट दिया, जबकि 276 वोट ही चिराग के खाते में गया। यहां चिराग 50 वोट से पिछड़ गए। इस मतदान केंद्र पर 1009 वोट में 64.2 फीसदी मतदान हुए थे और 646 मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया था। यहां बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में पहली चुनावी सभा जमुई लोकसभा क्षेत्र में की थी और वह कार्यक्रम बल्लोपुर गांव के मैदान में हुआ था। वहां ऐतिहासिक भीड़ जुटी थी। हालांकि, बल्लोपुर के अलावा आसपास के अधिकांश गांव में मतदान का प्रतिशत 65 से लेकर 80 फीसद तक रहा और उनमें अधिकांश वोट चिराग और एनडीए के खाते में गए।

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