गोपालगंज में फाइलों में फंसी नदियों के गाद की सफाई योजना

गर्मी के मौसम में सूख गया जिले से गुजरने वाली अधिकांश नदियों का पानी एक साल से संचिका में फंसी वाणगंगा नदी के जीर्णोद्धार की योजना।

JagranMon, 07 Jun 2021 09:17 PM (IST)
गोपालगंज में फाइलों में फंसी नदियों के गाद की सफाई योजना

जागरण संवाददाता, गोपालगंज : वैसे तो यह जिला नदियों का इलाका कहा जाता है। लेकिन गंडक से लेकर छोटी बड़ी आठ नदियों वाले इस जिले में संरक्षण के अभाव में अब गंदी हो चली नदियों के अस्तित्व पर ही संकट पैदा हो गया है। कुछ नदियां अतिक्रमण की शिकार हो संकरी हो चली हैं तो कुछ नदियां शैवाल व जलकुंभी से पट गई हैं। हालांकि करीब दो दशक पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी एसएम राजू ने नदियों की सफाई कराने की पहल की थी। तब शहर से गुजर रही छाड़ी नदी की सफाई के साथ ही उसमें नौकायन की व्यवस्था करने की योजना भी बनी थी। लेकिन यह योजनाएं फाइलों में ही दब कर रह गई।

वैसे पूरे जिले में दाहा, स्याही, सोना, गंडक, खनुआ, घोघारी, झरही तथा गंडक नदी बहती हैं। कभी नदियां जीवनदायनी कही जाती थी। लेकिन अब अधिकांश नदियों का पानी इतना प्रदूषित हो गया है कि मछलियां मरने लगी हैं। जिला मुख्यालय के बीचोंबीच से निकलने वाली छाड़ी नदी को ही देखें तो यह नदी नाला में तब्दील हो गई है। नदी के दोनों पाटों पर अतिक्रमण के साथ ही आधे से भी अधिक शहर का गंदा पानी इसी नदी में समाहित होता है। ऐसा तब है जबकि कई बार इस नदी की सफाई कराकर उसकी दशा को दुरुस्त करने की कवायद हो चुकी है। अलावा इसके सासामुसा बाजार से होकर पड़ोसी जिले सिवान के कई प्रखंडों से होकर गुजरने वाली वाणगंगा उर्फ दाहा नदी के जीर्णोद्धार की योजना भी करीब एक साल से फाइलों में फंसी है। तत्कालीन जिलाधिकारी अरशद अजीज ने इस नदी के कायाकल्प की दिशा में प्राक्कलन तैयार करने का निर्देश जारी किया था। लेकिन उनके स्थानान्तरण के बाद यह पहल फाइलों में दब गई है।

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मिल का बहता है गंदा पानी

गोपालगंज : जिले के सासामुसा से गुजरने वाली दाहा उर्फ वाण नदी की दशा भी काफी खस्ताहाल है। गंदगी के कारण मछलियां मरने लगी हैं। सासामुसा बाजार में स्थित चीनी मिल का गंदा पानी इसी नदी में गिरने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। वैसे करीब एक साल से यह चीनी मिल बंद है। बावजूद इसके नदी से अब भी बदबू उठती रहती है। ग्रामीण आए दिन नदी को प्रदूषण मुक्त कराने की मांग उठाते रहते हैं। लेकिन नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने की दिशा में प्लान बनाने से बात आगे नहीं बढ़ सकी है।

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घोघारी व सोना नदी भी उपेक्षित

गोपालगंज : जिले के बैकुंठपुर व सिधवलिया प्रखंड से होकर गुजरने वाली घोघारी नदी के अलावा कटेया व भोरे प्रखंड से होकर गुजरने वाली सोना नदी भी उपेक्षा की मार झेल रही है। इन नदियों की तलहटी की सफाई का कार्य नहीं होने के कारण इसमें सालों भर पानी नहीं रह पाता है। अलावा इसके स्याही व झरही नदी में लंबे समय से उपेक्षित है।

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छह दशक पूर्व हुई थी सफाई

गोपालगंज : बताया जाता है कि करीब छह दशक पूर्व गोपालगंज, छपरा जिले का एक अनुमंडल था। तब नदियों की तलहटी की सफाई की गई थी। इसके बाद नदियों को मानों प्रशासन ने भुला दिया। वर्तमान समय में नदियों की तलहटी साफ करने की कोई भी योजना संचालित नहीं होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।

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