विश्व एड्स दिवस : एड्स पीड़ित हुई, फिर भी खुद को सशक्त बना लिखी सफलता की गाथा

टनकुप्पा। साधारण कद-काठी व साधारण परिवार की ग्रामीण महिला ने एड्स रोग से पीड़ित होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। आज वह अपने उसी हौसले की बदौलत सफलता की नई गाथा लिख रही हैं।

JagranTue, 30 Nov 2021 11:29 PM (IST)
विश्व एड्स दिवस : एड्स पीड़ित हुई, फिर भी खुद को सशक्त बना लिखी सफलता की गाथा

टनकुप्पा। साधारण कद-काठी व साधारण परिवार की ग्रामीण महिला ने एड्स रोग से पीड़ित होने के बाद भी हार नहीं मानी और दृढ़इच्छा शक्ति के साथ सफलता की गाथा लिख समाज के लिए मार्गदर्शक बनीं। कम उम्र में उसे उसके पति से एडस हुआ। स्वजनों को जब इसकी जानकारी मिली तो सभी ने उससे मुंह मोड़ लिया पर उसने हिम्मत नहीं हारी। उस दौरान वह गर्भवती थी। इस रोग की छाया उसके गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ी।

जन्म के बाद इसकी जानकारी महिला को मिली। तीन बच्चों में दो बच्चे स्वस्थ व एक बच्चे पर रोग की छाया पड़ गई है। पर, इसके बाद भी वह घबरायी नहीं, बल्कि खुद को सशक्त किया और महिलाओं को सशक्तीकरण का पाठ पढ़ाने लगी। हालांकि प्रारंभ में समाज में उसे विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी। उनके द्वारा शुरू किया गया एक नया सफर औरों के लिए आज प्रेरणा की कहानी बना है। आज वह गांव में महिला व पुरुष के लिए भाभी बन गई हैं। उन्होंने अपने जीविकोपार्जन के लिए सिलाई का काम शुरू किया। इस बीच 2001 में उसके पति का निधन हो गया। तब वह थोड़ा परेशान हुई, लेकिन धैर्य नहीं जवाब दिया। युवतियों को नि:शुल्क सिलाई सिखाने लगी। फिर क्या सिलाई सीखने व कपड़े सिलने वालों की भीड़ बढ़ने लगी और फिर उक्त महिला का जीवन पटरी पर लौट आया। वर्ष 2006 में लोगों की चाहत पर निर्विरोध वार्ड सदस्य पद के लिए चुनी गई। 2010 में नारी सशक्तीकरण एवं एड्स जागरूकता कार्यक्रम में सफल भागीदारी निभाई। बिहार दिवस पर 2010 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने जिले में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित किया। एड्स जागरूकता ़िफल्म में वह मुख्य किरदार रहीं। वे आज भी एड्स जागरूकता कार्यक्रम में भाग लेने के लिए दूसरे राज्य जाती हैं। जिले में 5994 की एचआइवी जांच में मिले 265 पॉजिटिव

गया। जिले में एचआइवी संक्रमित मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी है। इस साल मगध मेडिकल अस्पताल स्थित आइसीटीसी सेंटर में 5994 सैंपल की जांच की गई। इसमें 265 की रिपोर्ट एचआइवी संक्रमित के रूप में पाया गया। इसमें गया जिले के अलावा दूसरे जिले के भी मरीज शामिल हैं। मेडिकल अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पताल में एचआइवी की जांच बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध है। 1017 गर्भवतियों की जांच में छह मिले संक्रमित, 54 सक्रिय केस :

इस साल गया जिले में 1017 गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच की गई। इनमें से छह महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। अहाना की रिपोर्ट के अनुसार गया जिला में अभी कुल 54 एक्टिव केस हैं। आज निकलेगी जागरूकता रैली :

-विश्व एड्स दिवस पर आज जेपीएन अस्पताल से जागरूकता रैली निकाली जाएगी। इस बात की जानकारी सीडीओ डॉ. पंकज कुमार सिंह ने दी। इस रैली के माध्यम से लोगों को एड्स के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके बचाव को लेकर जागरूक किया जाएगा। जीवनसाथी के प्रति बने वफादार, संक्रमित होने से बचें

जासं, गया : एक दिसंबर को पूरी दुनिया में व‌र्ल्ड एड्स दिवस मनाया जाता है। उद्देश्य इस गंभीर बीमारी के प्रति जन जागरूकता लानी है। विश्व एड्स दिवस के मौके पर समाज में जन जागरूकता लाने की जरूरत है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार इस बीमारी से सबसे बड़ा बचाव जागरूकता है। इस बारे में जिला वेक्टर बोर्न डिजीज नियंत्रण पदाधिकारी डॉक्टर एम ई हक ने कहा कि यदि कुछ जरूरी बातों का जीवन में ध्यान रखा जाए तो एचआईवी संक्रमण से बचा जा सकता है। इसमें अपने जीवन साथी के प्रति वफादारी बरतनी बहुत जरूरी है। असुरक्षित यौन संबंध नहीं बनाएं। संक्रमित सुई निडिल का इस्तेमाल, संक्रमित रक्त चढ़ाने से एचआईवी संक्रमण का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि इसका वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर में रहता है। जांच व इलाज के अनुसार दवा का सेवन करना चाहिए। एचआईवी संक्रमण के बाद एड्स होने का खतरा रहता है। इसलिए चिकित्सक की सलाह पर दवा लेनी चाहिए। सरकारी अस्पतालों में इसकी दवा मुफ्त में मिलती है।

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