कैमूर में यूरिया के लिए महिलाएं लाइन में हो रही हैं खड़ी, खाद नहीं मिलने से किसान परेशान

कैमूर में किसान लगातार खाद की किलल्त से परेशान हैं। गेहूं की बोआई के वक्त किसान बाजार से लेकर बिस्कोमान तक लगातार चक्कर लगा रहे हैं। खाद लेने के लिए महिलाएं लाइन में लग रही हैं। किसानों का कहना है कि सरकार को इस मसले का निदान करना चाहिए।

Rahul KumarMon, 22 Nov 2021 05:06 PM (IST)
सासारा में खाद की समस्या से किसान परेशान। सांकेतिक तस्वीर

 रामगढ़(कैमूर), संवाद सूत्र। जिले के किसान खाद की समस्या से जूझ रहे हैं। सोमवार को  बाजार से लेकर बिस्कोमान भवन पर यूरिया खाद के लिए दूसरे दिन भी लाइन किसानों की लगी रही। इस बार पहले खाद पाने के लिए किसान के रुप में महिलाएं खाद लेने पहुंच रही है। खाद की चाहत में वे बिस्कोमान भवन से लेकर बाजार के खाद विक्रेता के यहां पहुंचीं। लेकिन खाद खत्म होते ही लाइन में लगे आधे से अधिक किसान बिना खाद के घर लौटे। यह स्थिति अभी यूरिया खाद के लिए हो रही है। जबकि डीएपी खाद गेहूं की बुआई के समय में ही गायब है।

खाद नहीं मिलने से किसान परेशान

डीएपी खाद नहीं मिलने के साथ यूरिया खाद की जरूरत होने को लेकर दो दिनों तक किसानों में मारामारी की नौबत आ गई। सरकारी दर पर खाद पाने के लिए बिस्कोमान भवन पर महिलाएं भी लाइन में सुबह में ही लग गई। बिस्कोमान भवन पर एक आधार कार्ड पर छह बोरी तो बाजार में एक आधार कार्ड पर पांच बोरी अधिकतम यूरिया खाद दी जा रही थी। किसानों का कहना है कि रेट में अंतर होने से हमलोग बिस्कोमान भवन पर खाद लेने के लिए पहुंचे हैं ,फिर भी किसानों को मन माफिक यूरिया और डीएपी खाद नहीं मिलने से शासन प्रशासन के प्रति निराशा का भाव देखा गया। हालांकि खाद विक्रेता यूरिया की कमी नहीं होने का दावा कर रहे हैं।

लाइन में लग रही हैं महिलाएं

धान के टाप ड्रेसिंग के समय भी यूरिया खाद की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में नहीं होने से प्रशासन के दावे पर उंगली उठी थी। अब रबी फसल की बोआई के समय भी डीएपी व यूरिया खाद के संकट से किसानों को मुश्किल में डाल दिया है। कृषि विभाग के अधिकारी भी घूम घूम कर यूरिया खाद व डीएपी खाद की उपलब्धता की जानकारी लेते हैं। फिर भी खाद की किल्लत न जाने क्यों हो रही है। बाजार में डीएपी के साथ यूरिया खाद भी गायब हो गई है। बिस्कोमान भवन पूरी तरह से खाली हो गया है। कुछ किसानों ने बताया कि बाजार में कुछ जगहों पर खाद यूरिया लोग दे रहे हैं। लेकिन जितना यूरिया खाद चाहिए उतनी नहीं मिल रही थी। एक वर्ष से खरीफ व रबी फसल के समय ऐसी स्थिति किसानों के साथ हो रही है। व्यापारियों के लिए क्यों नहीं। व्यापारी माल दबाकर नहीं रखते तो खाद के लिए किसानों के साथ महिलाओं को क्यों लाइन में लगना पड़ता यह सोचने का विषय है।

क्या कहते हैं किसान

किसान महेंद्र तिवारी का कहना है कि एक तो बाढ़ से हमलोग परेशान हैं। दूसरे रबी फसल की बोआई के लिए डीएपी व यूरिया खाद नहीं मिलने की चिंता सता रही है। डीएपी खाद के लिए कई दिन से बाजार आ रहे हैं। लेकिन खाद नहीं मिली । वहीं अजय सिंह का कहना है कि बड़ी मशक्कत के बाद डीएपी व यूरिया खाद मिल रही है। इसके लिए रामगढ़ भाग के सुबह ही लाइन में लग गए थे। खाद की जरूरत दस बोरी यूरिया की है। जबकि खाद मिल रही है पांच बोरी। वह भी डीएपी की बजाए यूरिया खाद बिस्कोमान भवन पर मिली। वहीं किसान डब्बू तिवारी का कहना है कि, धूप के चलते लाइन में लगने पर हालत भी खराब हो रही है। यूरिया खाद पाने के लिए दो तीन घंटा लाइन में लगना पड़ रहा है। जिससे किसानों को परेशानी हो रही है। सरकार को चाहिए ससमय खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करें। ताकि किसान गोदाम पर खाद के लिए पहुंचे तो उसे आसानी से खाद मिल जाए।

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