औरंगाबाद में पुलिस पर हमला कर ट्रैक्टर छुड़ा ले गए उपद्रवी, दो जवान घायल; निरीक्षक का वाहन क्षतिग्रस्‍त

बालू माफिया के हाथों एक बार फिर बिहार पुलिस पिट गई। औरंगाबाद जिले के थाना क्षेत्र के भगवान बिगहा के सोन तटीय इलाके में बालू लदे ट्रैक्टर को जब्त कर थाना लाने के क्रम में उपद्रवियों ने पुलिस टीम पर जानलेवा हमला कर दिया।

Prashant KumarThu, 28 Oct 2021 02:19 PM (IST)
औरंगाबाद के थाने में एफआइआर दर्ज कराते खनन निरीक्षक। जागरण।

जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। बालू माफिया के हाथों एक बार फिर बिहार पुलिस पिट गई। औरंगाबाद जिले के थाना क्षेत्र के भगवान बिगहा के सोन तटीय इलाके में बालू लदे ट्रैक्टर को जब्त कर थाना लाने के क्रम में उपद्रवियों ने पुलिस टीम पर जानलेवा हमला कर दिया। दो पुलिसकर्मियों को घायल कर ट्रैक्टर छुड़ा ले गए। खनन निरीक्षक आजाद आलम के स्कार्पियो वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस घटना में दो पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। घटना गुरुवार सुबह की है। घटना के बाद खनन निरीक्षक आजाद आलम द्वारा दाउदनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

घटना की पुष्टि करते हुए थानाध्यक्ष शशि कुमार राणा ने बताया कि 22 -23 नामजद के खिलाफ नामजद आरोपित करते हुए थाना में प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। उपद्रवियों की पहचान कर ली गई है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। थानाध्यक्ष ने बताया कि अवैध बालू खनन की गुप्त सूचना पर खनन निरीक्षक और उनके नेतृत्व में पुलिस बल भगवान बिगहा गांव के पास स्थित सोन तटीय इलाके में पहुंची, जहां से एक बालू लदा ट्रैक्टर को जब्त कर भगवान बिगहा गांव होते हुए दाउदनगर थाना लाया जा रहा था।

गांव में उपद्रवियों ने टीम को घेरकर हल्ला-हंगामा मारपीट एवं गाली-गलौज करते हुए ट्रैक्टर को छुड़ा लिया। इस घटना में बिहार पुलिस के जवान लाल बाबू यादव और एक होमगार्ड का जवान जख्मी हुआ है। इलाज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दाउदनगर में किया गया।उपद्रवी तत्वों ने खनन निरीक्षक के स्कॉर्पियो वाहन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया है। पुलिस उपद्रवियों की गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी कर रही है।

गौरतलब है कि औरंगाबाद में ही नहीं, दूसरे जिलों में भी शराब और बालू माफिया द्वारा पुलिस पर हमला किए जाने की खबरें आ रही हैं। जानकार बताते हैं कि कई बार खनन विभाग और उत्‍पाद विभाग की गलत का खामियाजा थाना पुलिस को भुगतना पड़ता है। इन दोनों विभागों के अधिकारी पूरी तैयार कर छापेमारी के लिए नहीं जाते। यही कारण है कि पुलिस उपद्रवियों के सामने बौनी नजर आती है।

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