गया के सर्वोदय नगर में 80 एकड़ में फैला है फलदार पौधौं का बगीचा, बगीचे में लोगों ने भी बनाए बसेरा

गया जिले के परैया प्रखंड के सर्वोदय नगर में 80 एकड़ में फैला फलों का बगीचा लोगों के आकर्षण का केंद्र है। आम की मिठास और जामुन कि खुशबू से लोग यहां खिंचे चले आते है । हजारों लोगों की गुजर-बसर इस बगीचे पर निर्भर है।

Sumita JaiswalSun, 20 Jun 2021 10:47 AM (IST)
गया का सर्वोदय नगर बगीचा में खड़ा माली, जागरण फोटो।

 परैया (गया), संवाद सूत्र। रिमझिम बारिश के बीच पेड़ों की पत्तियों से पानी के बूंदों के गिरने की आवाज और पक्षियों के चहचहाहट से सुबह की शुरुआत के साथ गया जिले के परैया प्रखंड के सर्वोदय नगर की गतिविधि शुरू हो जाती है। जहां बहेलिया पेड़ों से पककर गिरे आम और जामुन को इकट्ठा करने में जुट जाते है। इसी समय से दूर दराज के लोगों का आना जाना भी मोरहर नदी के तट स्थित गांव में शुरू हो जाता है। सुबह के समय आस पड़ोस के गांव से लोग ताजा पेड़ के पके हुए फल लेने को पहुंच जाते है। जिसके बाद पूरा दिन यह सिलसिला चलता ही रहता है। जो फल गांव में बिके सो बिके बाकी फलों को लेकर पुरूष व महिला बहेलिया परैया और गुरारु बाजार को निकल जाते है। जहां उनके फलों की अच्छी कीमत मिल जाती है। सर्वोदय नगर के फलों की मांग टिकारी तक होती है।

नैचुरल फलों का स्‍वाद लेते हैं लोग

 ग्रामीणों के अनुसार टिकारी से प्रतिदिन दोपहिया व चार पहिया सवार आकर सर्वोदय नगर से बड़ी मात्रा में आम और जामुन ले जाते है। जहां बाजार में मालदह आम 60 रुपये प्रतिकिलो है। वहीं सर्वोदय नगर गांव में 40 रुपये प्रतिकिलो तक कच्चा और पक्का दोनों आम मिल जाता है। इसके अलावा अच्छे किस्म के ताजा जामुन भी कम कीमतों पर लोगों को मिल जाते है। ताजा फलों की मिठास और खुशबू बरबस लोगों को गांव की और खींच लेती है।

  टिकारी के जोलह बिगहा निवासी शिक्षक अरविंद कुमार बताते है कि प्रत्येक वर्ष उनके द्वारा सर्वोदय नगर बगीचा से कच्चे व पक्के आम की खरीद की जाती है। कच्चे आम को घर में ही भुस्सी या जुट के बोरी में रखकर पकाया जाता है।

बगीचे में बनाया बसेरा

80 एकड़ में विशाल फलदार वृक्षों का बगीचा लोगों के आकर्षण का केंद्र है। जिसमें आम, अमरूद, कटहल, बड़हर, बैर, जामुन जैसे फलों के विशाल बगीचे देखे जा सकते है। प्रतिवर्ष हजारों के आम व अन्य फल बेच रहे बहेलिया अब पशुपालन व मुर्गी पालन भी करते है। गांव से हटकर सभी ने अपने बगीचे में भी घर बना रखा है। पेड़ों की बीच बसेरा डाल कर उनके द्वारा जंगली जानवरों से अपने पेड़ व उसके फलों की रक्षा की जाती है। बागवान तिलक राम ने बताया कि दर्जन भर किसान के बगीचे के सभी पेड़ों को मिलाकर प्रतिवर्ष लगभग सौ टन आम का उत्पादन होता आया है। इस वर्ष अचानक मौसम के कड़े तेवर व एक कीट की बीमारी से फल की उपज महज दस फीसदी रह गयी है।

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