मंदिर में मिली कोमल अब मुंबई में पलेगी-बढ़ेगी, शेयर कारोबारी दंपती ने नन्‍हीं सी बच्‍ची को लिया गोद

रीतू की गोद में बच्‍ची को निहारते मनोज। जागरण

कैमूर के विशिष्‍ट दत्‍तक ग्रहण संस्‍थान में आवासित एक बच्‍ची को मुंबई के रहने वाले शेयर कारोबारी दंपती ने गोद लिया है। अब कोमल को माता-पिता का स्‍नेह मिलेगा। वह मुंबई में पलेगी-बढ़ेगी। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्‍ची को साैंपा गया।

Vyas ChandraWed, 03 Mar 2021 11:27 AM (IST)

जासं, भभुआ (कैमूर)। विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान की मासूम कोमल को ममता की छांव मिल गई। अब वह मुंबई में पलेगी-बढ़ेगी। रीतू और मनोज हरकिशन बत्रा उसके माता-पिता बन गए हैं। दरअसल बाल कल्याण समिति न्यायपीठ के सदस्य भानु प्रकाश शुक्ल ने रितु मनोज बत्रा और उनके पति मनोज हरकिशन बत्रा की गोद में केंद्रीय दत्तक ग्रहण संस्थान प्राधिकरण और न्यायालय ( परिवार न्यायालय कैमूर ) में कानूनी कार्यवाही पूर्ण होने के बाद कोमल को सौंप दिया। दोनों इस नन्‍हीं सी बच्‍ची को पाकर अभिभूत थे।
मंदिर परिसर में मिली थी बच्‍ची
भानु प्रकाश शुक्‍ल ने बताया कि नवजात बच्‍ची बेलाव थानांतर्गत मझिआंव गांव के मंदिर से चाइल्ड लाइन वर्कर को मिली थी। उसने बाल कल्याण समिति में बच्‍ची को सौंपा था। उसे समिति ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के अंतर्गत संपूर्ण इलाज कराने के बाद विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में आवासित कराया था। उसका नाम कोमल रखा गया। जैविक माता-पिता न मिलने के कारण विज्ञापन प्रकाशन 60 दिन की अवधि पूरा होने पर दत्तक ग्रहण के लिए विधिक रूप से स्वतंत्र घोषित जेजे एक्ट 2015 के अंतर्गत किया था। बच्ची को केंद्रीय दत्तक ग्रहण संस्थान प्राधिकरण और परिवार न्यायालय कैमूर की विधिक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद मुंबई (मलाड ईस्ट ) निवासी शेयर बाजार में कार्यरत दंपती को सौंप दिया गया।  इस अवसर पर प्रभारी सहायक निदेशक वरुंजय कुमार, साधना गुप्ता अध्यक्ष बाल कल्याण समिति, कुमारी राजकुमारी, रामअशीष सिंह, जितेंद्र पाल सीपीओ, संस्थान के समन्यवक, सामाजिक कार्यकर्ता आदि मौजूद थे।
कई प्रांतों के दंपती यहां से बच्‍चों को ले चुके हैं गोद
बता दें कि कैमूर जिला मुख्यालय में स्थित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में पल रहे आधा दर्जन से अधिक बच्चों को विभिन्न प्रांतों की दंपती ने गोद लिया है। इस संस्थान में पल रहे बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति चिकित्सक सहित जिला प्रशासन के अधिकारी भी काफी सतर्क रहते हैं। समय-समय पर वरीय पदाधिकारी संस्थान की जांच कर चिकित्सक व कर्मियों को आवश्यक दिशा निर्देश देते रहते हैं।

 

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