Surya Grahan End Timing: साल का पहला सूर्यग्रहण आज खत्‍म, नहीं पड़ा बिहार पर कोई असर

Surya Grahan End Timing गुरुवार को साल 2021 का पहला सूर्यग्रहण लगा था। लगभग पांच घंटे तक ग्रहण रहा लेकिन बिहार पर इसका कोई असर पड़ा। इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और आशंकाएं व्‍यक्‍त की जा रही थीं। मगर शंकाएं धरी रह गईं।

Prashant KumarWed, 09 Jun 2021 06:26 PM (IST)
गुरुवार को लगेगा साल 2021 का पहला सूर्यग्रहण। जागरण आर्काइव।

पटना, जागरण संवाददाता। Surya Grahan 2021 End वट सावित्री पूजन के अवसर पर गुरुवार को साल 2021 का पहला सूर्यग्रहण लगा। इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और आशंकाएं व्‍यक्‍त की जा रही थीं। मगर इसका असर गया सहित पूरे बिहार पर पड़ने वाला नहीं था। बिहार में ग्रहण नजर नहीं आया, इसलिए इसका सूतक काल मान्‍य नहीं हुआ। सूतक काल में धार्मिक कार्य निषिद्ध रहते हैं, लेकिन इसके मान्‍य नहीं होने के कारण गुरुवार को वट सावित्री पूजा व शनि जयंती मनाने पर प्रतिबंध नहीं रहा।

गुरुवार को 1:42 बजे से 6:41 बजे तक ग्रहण

गुरुवार को कंकणाकृति सूर्यग्रहण लगा। यह बिहार ही नहीं, बल्कि भारत में कहीं देखा जाने नहीं गया। यही कारण है कि ग्रहण के दौरान सूतक काल मान्‍य नहीं रहा। वैसे ज्‍योतिषों ने वृष, कर्क, तुला, धनु और मीन राशि के जातकों को सावधानी बरतने की सलाह दी थी। सूर्यग्रहण का समय अपराह्न 01:42 बजे से शाम 06:41 बजे तक बताया गया था। यह ग्रहण वृष राशि और मृगशिरा नक्षत्र में लगा।

जानिए कहां-कहां दिखा साल का पहला सूर्य ग्रहण

बड़ी बात है कि ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पर लगा साल का पहला सूर्यग्रहण नॉर्थ अमेरिका के उत्तर भाग, यूरोप और एशिया के कुछ हिस्‍सों में देखा गया। इसके अलावा कनाडा के उत्तर-पूर्वी भाग, रूस, मंगोलिया, चीन के पश्चिमी भाग और ग्रीनलैंड के सभी हिस्‍सों में नजर आया। यह भारत में नहीं दिखा।

अखंड सौभाग्‍य को महिलाएं कर रहीं वट सावित्री व्रत

अखंड सौभाग्‍य की कामना करने वाली सुहागिन महिलाओं ने रोहिणी नक्षत्र और धृति योग में वट सावित्री का व्रत किया। इसे ग्रह-गोचर के हिसाब से शुभ संयोग माना गया था। शनि भक्‍तों के लिए भी यह संयोग मंगलकारी साबित हुआ। मानयता है कि अमावस्‍या का प्रवेश सर्वार्थ सिद्धि योग में हुआ है। इस दौरान चंद्रमा अपनी उच्‍च राशि वृष में विद्यमान रहेगा। सूर्योदय के समय बुधादित्य योग होने से वट सावित्री पूजन की महत्ता बढ़ जाती है। इसका उल्‍लेख स्‍कंद पुराण में भी है। ज्‍योतिषों का मानना है कि वट सावित्री का व्रत रखने वाली महिलाओं के पति दीर्घायु होते हैं। उनके वंश में वृद्धि होने के साथ दांपत्‍य जीवन सुखमय होता है। वैवाहिक जीवन में आने वाले कष्‍टों से भी मुक्ति मिलती है।

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