मेड इन कोलकाता लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा बनी गया के लोगों की पहली पसंद

मान्यता है कि मिट्टी से बनी प्रतिमा पूरी तरह से शुद्ध होती है। इसके कारण मेड इन कोलकाता प्रतिमाएं गया में ग्राहकों की पहली पसंद बनी हैं। बाजार में 50 से दस हजार रुपये तक की प्रतिमाएं उपलब्‍ध हैं।

Sumita JaiswalSat, 23 Oct 2021 12:29 PM (IST)
बाजार में आ गई लक्ष्‍मी-गणेश की प्रतिमा, जागरण फोटो।

गया, जागरण संवाददाता। दीपावली के मौके पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा प्रतिष्ठापित कर पूजा-अर्चना की जाती है। इसके लिए बाजारों में कई तरह की प्रतिमाएं बिक रही हैं। पसंद के अनुसार लोग खरीद रहे हैं। कोलकाता में निर्मित प्रतिमा को लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं। यह पूरी तरह से मिट्टी से निर्मित है। मान्यता है कि मिट्टी से बनी प्रतिमा पूरी तरह से शुद्ध होती है। इसके कारण ग्राहकों की पहली पसंद बनी है।

शहर के केपी रोड स्थित प्रतिमा विक्रेता अमित पांडेय कहते हैं कि लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा कोलकाता, उत्तर प्रदेश के चुनार, मीरजापुर एवं लखनऊ से मंगाई जाती है। चुनार की प्रतिमा चूना एवं प्लास्टर आफ पेरिस से बनी होती है। इसलिए ग्राहक पसंद करते हैं।

उन्होंने कहा कि दीपावली को लेकर एक माह पहले से लोग तैयारी करते हैं। प्रतिमा के लिए उक्त स्थानों पर आर्डर देते हैं। दुर्गा पूजा के बाद ही प्रतिमा मंगाने की तैयारी शुरू हो जाती है। धनतेरस के पांच दिन पहले तक प्रतिमाएं शहर में पहुंच जाती हैं। प्रतिमा का दाम 50 से दस हजार रुपये का तक है। सबसे अधिक बिक्री एक सौ से पांच सौ रुपये वाली प्रतिमाओं की होती है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार प्रतिमा की बिक्री अच्छी हो रही है।

चुनार में बनी प्रतिमाओं की अधिक मांग

दीपावली के मौके पर चुनार की बनी लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं की मांग ग्रामीणों क्षेत्र में अधिक होती है। प्रतिमा प्लास्ट आफ पेरिस से बनी होने के कारण कम दाम होता है। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बिक्री अधिक होती है। वहीं कोलकाता की बनी लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा शहरी क्षेत्रों में अधिक बिक्री होती है। मिट्टी की बनी प्रतिमाएं देखने में काफी सुंदर लगती हैं। चुनार कीप्रतिमा की अपेक्षा कोलकाता का बनी प्रतिमा की कीमत अधिक होती है फिर भी शहर के लोगों की पहली पसंद कोलकाता की प्रतिमाएं हैं।

नुकसानदायक होता है प्लास्टर आफ पेरिस

मगध विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के प्रोफेसर पार्थ प्रतीम दास ने कहा कि प्लास्टर आफ पेरिस काफी नुकसानदायक होता है। इससे बनी प्रतिमा नदी और तालाब के पानी में घुलता नहीं है, जिससे कारण पानी प्रदूषित हो जाता है। मिट्टी की बनी प्रतिमा आसानी से पानी में घुल जाती है। प्लास्टर आफ पेरिस की जगह दीपावली में मिट्टी की बनी प्रतिमा की पूजा करें।

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