बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र के रामगढ़ में स्थापित हैं 84 विद्यालय

बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र के रामगढ़ में स्थापित हैं 84 विद्यालय

सरकार की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने की कोशिश धरातल पर दम तोड़ती दिख रही है।

JagranMon, 19 Apr 2021 05:09 PM (IST)

गया। सरकार की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने की कोशिश धरातल पर दम तोड़ती दिख रही है। कई दशकों से कैमूर जिले के रामगढ़ प्रखंड में संचालित सरकारी विद्यालयों को अभी तक अपनी भूमि का दस्तावेज तक नहीं है। और न ही किसी को मालिकाना हक प्राप्त हुआ है। एक तरह से कहा जाए कि भवन चकाचक व व्यवस्था नगण्य तो कोई अतिशयोक्ति नहीं। बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के विद्यालय भवन स्थापित हो गए है। इस स्थिति का खुलासा तब हुआ जब राज्य सरकार ने शिक्षा विभाग से संबंधित विद्यालयों की भूमि की दस्तावेज मांगी। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किस विद्यालय के पास कितनी जमीन है और किस खेसरा रकबा व मौजा में स्थित है। लेकिन जब इसकी जानकारी लेने की प्रक्रिया शुरू हुई तो यह बात सामने आने लगी कि हमारे पास कोई विद्यालय की भूमि से संबंधित दस्तावेज नहीं हैं। कितनी भूमि व कैसी भूमि पर विद्यालय भवन बना हुआ है इसका मालिकाना अधिकार किसके पास है यह बताने में शिक्षा विभाग ही फेल हो गया। ऐसी हालत में विद्यालयों के भवन की पटकथा की कहानी कुछ यूं ही बयां कर रही है। प्राय: सभी विद्यालयों का धरातल पर भवन तो बना है लेकिन वह भूमि कैसी है किसके नाम से खतियान में दर्ज है यह बताने में एचएम से लेकर शिक्षा विभाग अनभिज्ञता जता रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि रामगढ़ के जीबी कॉलेज, प्लस टू हाई स्कूल रामगढ़ व देहलियां प्लस टू स्कूल को छोड़कर शेष सभी विद्यालयों की अद्यतन स्थिति की जानकारी में शिक्षा विभाग जुट गया है। आखिरकार केवल भूमि का अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने से विद्यालय की इमारत खड़ी कैसे हो गई। यह अब जांच का विषय बनता जा रहा है। जब विद्यालय को अपने ही भवन व भूमि का मालिकाना अधिकार नहीं है तो वह जमीन कैसे समय आने पर किसी को हस्तांतरित की जा सकती है। अंचल कार्यालय के पास भी विद्यालय की भूमि से संबंधित कोई खतियान नहीं है और न ही पंजी टू में यह जमीन विद्यालयों के नाम से दर्ज है। यानि सब हवा हवाई है। इस लचर व्यवस्था से विद्यालयों में अबतक खेल मैदान नहीं बना। माध्यमिक प्लस टू विद्यालयों में भवन निर्माण के लिए प्राप्त होने वाली राशि से पहले विभाग दस्तावेज खोज रहा है। ताकि जमीन का नेचर क्या है। किस स्थिति में जमीन है और मालिकाना हक किसको प्राप्त है। तभी राशि आवंटित होगी। इसको लेकर शिक्षा विभाग फाइल खंगालने में जुट गया है।

बता दें कि रामगढ़ प्रखंड में कुल 84 विद्यालय हैं। जिसमें छह पुराने हाईस्कूल प्लस टू हैं। 41 प्राथमिक विद्यालय व 37 मध्य विद्यालय हैं। इनमें छह को छोड़कर सभी विद्यालय का अपना मालिकाना हक प्राप्त नहीं है। इस संबंध में बीईओ सतीश कुमार ठाकुर ने बताया कि हमें भी आश्चर्य हो रहा कि विद्यालय का भवन बना है लेकिन विभाग के पास इसका कोई दस्तावेज ही नहीं है। जिसको लेकर शिक्षा विभाग तत्पर हो गया है। एनओसी पर केवल विद्यालय का निर्माण हुआ है।

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