भभुआ में कन्या मध्य विद्यालय की पानी टंकी से गिरकर बर्बाद हो रहा शुद्ध पानी, शिकायत के बाद सुनवाई नहीं

कन्या मध्य विद्यालय भगवानपुर में गिरकर बर्बाद होता पानी।

कन्या मध्य विद्यालय भगवानपुर में बीते दिनों संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में रूबन मिशन योजना के तहत पानी टंकी का निर्माण कराया गया था। पानी टंकी के निर्माण के बाद जब उसमें पानी भरा गया तो उसी समय से पानी टंकी से पानी टपक रहा है।

Publish Date:Sun, 24 Jan 2021 03:49 PM (IST) Author: Akshay Pandey

संवाद सूत्र, भगवानपुर: स्थानीय प्रखंड में कन्या मध्य विद्यालय भगवानपुर में बीते दिनों संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में रूबन मिशन योजना के तहत पानी टंकी का निर्माण कराया गया था। पानी टंकी के निर्माण के बाद जब उसमें पानी भरा गया तो उसी समय से पानी टंकी से पानी टपक रहा है। एचएम अरविंद कुमार सिंह के द्वारा कई बार संवेदक से लेकर पदाधिकारी तक इसकी शिकायत की गई। लेकिन अब तक पानी टंकी से पानी टपकने की समस्या दूर नहीं हो सकी। इसके चलते इस पानी टंकी से बेवजह शुद्ध पानी गिर कर बर्बाद हो रहा है। अब सवाल उठता है कि जब सरकारी संस्थान में ही पानी का संरक्षण नहीं होगा तो आमलोग कैसे इसके प्रति जागरूक होंगे।

जबकि जल संरक्षण और हर घर तक नल का जल पहुंचाने के लिए सरकार काफी राशि खर्च कर रही है। सरकार के प्रयास से ही इस विद्यालय में पानी टंकी लगाई गई ताकि यहां के छात्राओं को पेयजल के लिए परेशानी न हो। लेकिन इस पानी टंकी के निर्माण के बाद ही से पानी टपकना लापरवाही को  उजागर करता है। यदि भगवानपुर प्रखंड क्षेत्र के अन्य जगहों पर नल जल योजना की बात की जाए तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। प्रखंड में नल जल योजना बहुत सफल नहीं हो पा रही है। कहीं पाइप बिछा है तो कही नहीं। किसी वार्ड में पानी जा रहा है तो किसी में नहीं। इसके चलते भगवानपुर प्रखंड में पेयजल की समस्या अब भी बरकरार है।

चाहे वह सरकारी संस्थान हो या गांव। विद्यालय में पानी टंकी से पानी टपकने के चलते उस स्थान पर हमेशा जलजमाव रहता है। जलजमाव के चलते विद्यालय परिसर में गंदगी भी है। इसके चलते संक्रामक बीमारी होने का डर भी बना हुआ है। जबकि इन दिनों सफाई को लेकर सभी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इन जागरूकता कार्यक्रमों में छात्र-छात्राओं का सहयोग लिया जा रहा है। दूसरों को जागरूक करने वाले छात्र-छात्राओं को ही गंदगी व जलजमाव के बीच शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। यह काफी गंभीर समस्या है। 

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