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कोरोना से मुक्ति की प्रार्थना, विष्‍णुपद मंदिर में श्री हरि के चरण चिह्न का 51 किलो दूध से हुआ अभिषेक

श्री हरि के चरण चिह्न की पूजा करते पुजारी। जागरण

कोरोना से मुक्ति को लेकर भगवान श्रीहरि विष्णु का शुक्रवार को दुग्धाभिषेक किया गया। इस दौरान 51 किलो दूध श्रीहरि के चरण पर वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अर्पित किया गया। मंदिर बंद रहने के कारण आम श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति नहीं मिली।

Vyas ChandraFri, 14 May 2021 07:53 PM (IST)

गया, जागरण संवाददाता।  कोरोना वायरस पूरे दुनिया में कहर बरपा रहा है। संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने सभी धार्मिक स्थलों को बंद कर रखा है। मंदिरों में भगवान की पूजा-अर्चना सिर्फ पुजारी कर रहे हैं।आम श्रद्धालुओं को प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा है। ऐसे में कोरोना महामारी से मुक्ति एवं विश्वकल्याण को लेकर विश्‍वप्रसिद्ध विष्‍णुपद मंदिर में शुक्रवार को अक्षय तृतीया के अवसर पर भगवान श्रीहरि विष्णु का दुग्धाभिषेक किया गया। दुग्धाभिषेक पूजा का आयोजन विष्णुपद प्रबंधकारिणी विकास समिति एवं गयापाल पंडा समाज की ओर किया गया था।
भगवान के च‍रण में अर्पित किया 51 किलो दूध 
समिति के सदस्य महेश लाल गुपुत ने कहा कि अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर कोरोना महामारी से निजात एवं विश्व कल्याण के लिए भगवान श्रीहरि विष्णु के चरण चिह्न पर 51 किलो दूध अर्पित किया गया। इसके साथ श्री विष्णु सहस्त्रनाम के साथ तुलसी अर्चना की गई। दुग्धाभिषेक एवं तुलसी अर्चना मुरलीधर आचार्य के वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पांच गयापाल पुरोहितों ने किया। आयोजन में आम श्रद्धालुओं को प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा था। क्योंकि कोरोनाकाल में मंदिर का प्रवेशद्वार बंद है। उन्‍होंने कहा कि भगवान श्री हरि की आराधना ही इस विपदा की घड़ी में सहारा है। 
पहली लहर के समय भी की गई थी विशेष पूजा
विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति का मानना है कि श्रीविष्णु की आराधना से काेरोना से मानव को मुक्ति मिलेगी।  कोरोना की पहले लहर में भी समिति की ओर से कई आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। भगवान का पट आम लोगों के दर्शनार्थ तो पूरी तरह बंद है। लेकिन वहां के स्थायी पुजारी श्रीचरण का पूजन-पाठ नित करते आ रहे हैं। इस समय भगवान से सिर्फ कोरोना से मुक्ति की आराधना हो रही है। आज अक्षय तृतीया की तिथि पर समिति द्वारा यह आयोजन किया गया। जिसमें शारीरिक दूरी रखकर समिति और गयपाल समाज के लोगों ने बाहर से ही नमन किया।

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