Cattle Vaccination : पशुओं को एफएमडी का टीका लगवाने के लिए अभी करना होगा इंतजार, मानकों पर खरा नहीं उतरी वैक्सीन

पशुओं के टीकाकरण में होगा विलंब। प्रतीकात्‍मक फोटो

गया जिले में 1 दिसंबर से टीकाकरण कार्यक्रम शुरू होना था। इसमें 11.54 लाख पशुओं को टीका लगाना है। लेकिन इस वर्ष टीकाकरण में विलंब के आसार हैं। क्‍योंकि एफएमडी वैक्‍सीन मानक पर खरा नहीं उतर सका है।

Publish Date:Sat, 28 Nov 2020 01:28 PM (IST) Author: Vyas Chandra

जेएनएन, गया। जिले के पशुपालकों को अपने मवेशियों को एफएमडी (खुरहा- मुंह पका रोग) का टीका लगवाने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। क्योंकि जिले में दिसंबर के पहले हफ्ते से शुरू होने वाले इस टीकाकरण कार्यक्रम को फिलहाल टाल दिया गया है। पशुपालन विभाग के पदाधिकारियों में ही असमंजस की स्थिति है कि नियत समय से टीकाकरण शुरू हो पाएगा या नहीं। दरअसल टीकाकरण की वैक्सीन अपने मानकों पर खरा नहीं उतर सकी है।

11 लाख 54 हजार पशुओं के टीकाकरण का है लक्ष्‍य

गौरतलब है कि दिसंबर और जनवरी माह में एफएमडी रोग से बचाव के लिए दुधारू पशुओं को साल में दो बार टीके लगाए जाते हैं। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत इस बार भारत सरकार ने गया जिले में 11 लाख 54 हजार पशुओं के टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा था। वर्ष 2020 के जनवरी माह में 8.60 लाख पशुओं का टीकाकरण किया गया था। लेकिन इस बार सरकार के निर्देशानुसार सभी गायों और पशुओं का टीकाकरण होना था। जिला पशुपालन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार एक दिसंबर से यह टीकाकरण का प्रोग्राम शुरू होना था लेकिन मानकों में फेल होने के कारण टीकाकरण को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉक्टर अनिल कुमार ने कहा कि एफएमडी टीकाकरण को लेकर विभाग से अभी स्पष्ट कोई गाइडलाइन नहीं मिला है। जैसे ही कोई निर्देश मिलेगा उस तरह से कार्रवाई की जाएगी।

एफएमडी का वायरस पशुओं के लिए होता है जानलेवा

एफएमडी यानी खुरहा- मुंहपका रोग पशुओं को होने वाले एक प्रमुख वायरस जनित रोग है। इसमें जानवर के मुंह में फोला पड़ जाता है। इसके लार्वा में उपस्थित वायरस इन्हें बीमार कर देते है  जिसके चलते यह कुछ भी खाने पीने से लाचार हो जाता है। साथ ही पशुओं के खुर में भी घाव हो जाते हैं। इससे मवेशी चलने फिरने से लाचार हो जाते हैं। समय पर यदि पशु के बीमारी की इलाज नहीं की गई तो जान भी जा सकती है।

 

पशुओं की गर्भधारण क्षमता को कम करने से लेकर दूध उत्पादन पर पड़ता है बुरा असर

पशु विभाग के वरीय चिकित्सक सह नोडल पदाधिकारी डॉ उपेंद्र कुमार बताते हैं कि एफएमडी रोग पशु पालकों के लिए बड़ा आर्थिक नुकसान लेकर आता है। यदि कोई बाछी गर्भधारण करने की स्थिति में है और इससे पहले उसे यह रोग हो जाए तो गर्भधारण की क्षमता समाप्त होने की संभावना बढ़ जाती है। यदि पशु गर्भावस्था में है और यह बीमारी हो गई तो उसके गर्भस्थ बच्चे के खराब होने की संभावना रहती है। साथ ही साथ बीमारी के चलते पशुओं के दूध उत्पादन पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

 

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