जवानी में की हत्या, बुढ़ापे में मिली सजा, नवादा कोर्ट ने चार सहोदर भाइयों समेत छह को सुनाई आजीवन कारावास की सजा

हत्या की घटना 24 अप्रैल 1988 की है। घटना के तिथि से 33 साल 5 माह 8 दिन गुजरने बाद अभियुक्तों को उनके जुर्म की सजा मिली। हालांकि घटना के समय सभी आरोपी युवा अवस्था में थे। लकिन बुढ़ापा में सजा काटने को विवश हुए।

Sumita JaiswalSat, 25 Sep 2021 06:38 AM (IST)
सुनवाई के दौरान दो आरोपितों की मृत्‍यु हो गई, सांकेतिक तस्‍वीर।

नवादा, संवाद सूत्र।  हत्या के आरोप में छह लोगों को आजीवन का कारावास की सजा सुनवाई गई। सप्तम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार सिंह ने गुरुवार को सजा सुनाई। सजा पाने वाले आरोपित सत्येन्द्र प्रसाद, रूप लाल प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, चांदो प्रसाद, कुलदीप प्रसाद व रघु उर्फ रघुनंदन प्रसाद हैं, जो सिरदला थाना क्षेत्र के लक्ष्मी बिगहा निवासी है। जिनमें से रूपलाल प्रसाद, चांदो प्रसाद, कुलदीप प्रसाद व रघु उर्फ रघुनंदन सहोदर भाई बताये जाते हैं। मामला सिरदला थाना कांड संख्या 33/1988 से जुड़ा है।

जानकारी देते हुए अपर लोक अभियोजक अजित कुमार ने बताया कि 24 अप्रैल 1988 की संध्या उसी गांव निवासी महावीर महतो आहर गए थे। जहां आरोपियों समेत बालमुकुंद मिस्त्री एवं सकुर मियां ने मिलकर तेजधार हथियार से महावीर महतो की हत्या कर दी थी। घटना के बाबत मृतक के पुत्र रामस्वरूप प्रसाद ने सिरदला थाना में कांड दर्ज कराया था। कांड के विचारण के लंबीे अवधि में बालमुकुंद मिस्त्री एवं सकुर मियां की मृत्यु हो गई। गवाहों ने अदालत में अपना बयान दर्ज करा कर घटना को प्रमाणित किया। फलस्वरूप न्यायाधीश ने छह अभियुक्तों पगला उर्फ सत्येंद्र प्रसाद, रूप लाल प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, चांदो प्रसाद, कुलदीप प्रसाद व रघु उर्फ रघुनन्दन प्रसाद को भादवि की धारा 302/149 के तहत आजीवन कारावास तथा प्रत्येक आरोपियों को 10-10 हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई। इसके अलावे धारा 148 के तहत तीन साल तथा

प्रत्येक को 5 हजार रुपये अर्थ दंड की सुजा सुनाई गई।

जवानी में किया अपराध, बुढ़ापे में मिली सजा

हत्या की घटना 24 अप्रैल 1988 की है। घटना के तिथि से 33 साल 5 माह 8 दिन गुजरने बाद अभियुक्तों को उनके जुर्म की सजा मिली। हालांकि घटना के समय सभी आरोपी युवा अवस्था में थे। लकिन बुढ़ापा में सजा काटने को विवश हुए। इस लंबी अवधि के दौरान दो आरोपित की मृत्यु भी हो गई। लेकिन समय चाहे जो भी गुजरे पीडि़त परिवार को न्याय मिला। वर्चुअल व्यवस्था के तहत सुनाई गई सजा सजा पाने वाले सभी आरोपी मंडल कारा में बंद हैं।

अदालत ने वर्चअल व्यवस्था के तहत आरोपितों को सजा सुनाई। इसके पूर्व न्यायाधीश ने विडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा बचाव पक्ष व अभियोजन पक्ष की दलीलों को सुना।

 

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