सासाराम में मच्छरों ने बढ़ाया मॉस्किटो रिपेलेंट का बाजार, ढाई करोड़ का हुआ कारोबार, बढ़ रहीं बीमारियां भी

मच्‍छरों के आतंक की वजह से ढाई करोड़ के मॉस्किटो रिपेलेंट बिके। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

रोहतास जिले में मच्छरों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि से मॉस्किटो रिपेलेंट क्वायल अगरबत्ती व मच्छररोधी क्रीम का बाजार बढ़ गया है। हालांकि बचाव के ये भी तरीके पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो रहे हैं। मच्छररोधी दवा का छिड़काव भी नहीं हो रहा है।

Prashant KumarFri, 26 Feb 2021 04:41 PM (IST)

जागरण संवाददाता, सासाराम। रोहतास जिले में मच्छरों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि से मॉस्किटो रिपेलेंट, क्वायल, अगरबत्ती व मच्छररोधी क्रीम का बाजार बढ़ गया है। हालांकि, बचाव के ये भी तरीके पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो रहे हैं। एक तो लोगों की जेब पर ये भारी पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदेह साबित हो रहा है। वहीं नगर परिषद मोहल्लों व गलियों में साफ सफाई के प्रति उदासीन है। मच्छररोधी दवा का छिड़काव  भी नहीं हो रहा है।

मच्छरों से बचाव के लिए लोग पूरी तरह मॉस्किटो रिपेलेंट, क्वायल, अगरबत्ती, फास्ट कार्ड आदि पर  निर्भर हैं। जो लोग मच्छरदानी का प्रयोग करते हैं, वे भी दिन से ले रात्रि में सोने के लिए बिस्तर पर जाने तक इनका ही प्रयोग करते हैं। वैसे तो यहां सालों भर मच्छरों का प्रकोप रहता है, लेकिन इस मौसम में इनकी बेतहाशा वृद्धि होने से विभिन्न कंपनियों के मॉस्किटो रिपेलेंट की मांग बढ़ गई है। व्यवसायियों के मुताबिक जिले में औसतन हर महीने 20 लाख रुपये से अधिक के मॉस्किटो रिपेलेंट का कारोबार विभिन्न बाजारों में हो रहा है। इसके अलावा क्वायल, क्रीम, अगरबत्ती का कारोबार अलग है। इस तरह हर वर्ष जिले के लोग लगभग ढाई करोड़ से ज्यादा रुपये मच्छरों से बचाव पर खर्च कर रहे हैं।

बेअसर हो रहे कृत्रिम उपाय

मच्छर भगाने के लिए बाजार से खरीद कर लाए जाने वाले क्वायल व लिक्विड प्रयोग तो किया जा रहा है, लेकिन वे सभी बेअसर साबित हो रहे हैं। क्वायल खत्म होने के कुछ देर बाद ही ये जानलेवा मच्छर दोबारा हमला बोल देते हैं। हालांकि ये मच्छर रोधी रिपेलेंट कुछ देर के लिए भले ही मच्छरों का प्रकोप कम कर देते हैं, लेकिन इनमें प्रयोग होने वाले केमिकल्स स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।

कहते हैं चिकित्सक

शिशु रोग विशेषज्ञ व पूर्व चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके झा कहते हैं कि बच्चे, गर्भवती और श्वांस रोगियों के लिए ये रिपेलेंट व क्वायल घातक हैं।बदलते मौसम में वैसे भी श्वांस रोगियों की समस्या बढ़ जाती हैं। ऊपर से रासायनिक केमिकल से युक्त  सामानों के प्रयोग से फेफड़ा में जकडऩ और बढ़ जाती है। इससे त्वचा में खुजली, आंखों में जलन, सुस्ती, होठों पर खुश्की व सिरदर्द जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं।

कहते हैं अधिकारी

एसीएमओ डॉ. केएन तिवारी मौसम परिवर्तन के चलते मच्छरों की उत्पत्ति में वृद्घि हो रही है, जिससे मच्छर जनित रोग बढऩे की संभावना है।मलेरिया या डेंगू बुखार के लक्षण महसूस होते हैं, तो तुरंत निकट के स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच कराएं।सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। साथ ही अपने आसपास अनुपयोगी पानी जमा न होने दें।

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