MLC ने सदन में उठाया जोकहरी नदी की बदहाली का मुद्दा, सनातन संस्‍कृति में है इसका महत्‍व, जानें क्‍या हुआ

क्या सरकार इस नदी को अतिक्रमणमुक्त कराने का विचार रखती है। इसके जवाब में जल संसाधन मंत्री ने जवाब दिया कि वास्तविक अतिक्रमण की स्थिति स्थल की मापी अंचल कार्यालय द्वारा कराए जाने पर स्पष्ट होगा। मापी करवाकर नियमानुकूल अग्रेतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

Prashant KumarFri, 30 Jul 2021 11:49 AM (IST)
अतिक्रमण से घिरी प्राचिन गया की जोकहरी नदी। जागरण।

जागरण संवाददाता, गया। वजीरगंज प्रखंड मुख्यालय की जोकहरी नदी की बदहाली का मुद्दा विधान पार्षद संजीव श्याम सिंह (Sanjeev Shayam Singh) ने सदन में उठाया। जल संसाधन विभाग के मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि यह अतिप्राचीन नदी के दोनों किनारे पर अतिक्रमण कर लिया गया है। इसके कारण यह नदी काफी पतली हो गई है।

उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या सरकार इस नदी को अतिक्रमणमुक्त कराने का विचार रखती है। इसके जवाब में जल संसाधन मंत्री ने जवाब दिया कि वास्तविक अतिक्रमण की स्थिति स्थल की मापी अंचल कार्यालय द्वारा कराए जाने पर स्पष्ट होगा। विभागीय पत्रांक- 325 दिनांक 26 जुलाई 2021 द्वारा स्थल मापी करवाकर नियमानुकूल अग्रेतर कार्रवाई करने के लिए मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना को निर्देशित किया गया है।

साथ ही विभागीय पत्र-326 दिनांक 26 जुलाई 2021 के द्वारा जिला पदाधिकारी गया को भी अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि वजीरगंज प्रखंड सह अंचल मुख्यालय से पूरब दिशा की ओर बह रही जोकहरी नदी का सनातन संस्कृति में काफी महत्व बताया गया है। पूर्व में इसकी चौड़ाई करीब 80 फीट थी। जो अब घटकर महज 20 फीट रह गई है। इस नदी में इन दिनों गंदगी का अंबार देखा जा सकता है। इसके आसपास कई मकान भी बन गए हैं।

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