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कोरोना ठीक हो गया तब प्रशासन ने भेजी मेडिकल किट, निगम कर्मी ने कहा-ले लीजिए, जवाब देना है

टेस्‍ट रिपोर्ट के 20 दिनों बाद मिली मेडिकल किट। प्रतीकात्‍मक फोटो

गया शहर के एक व्‍यक्ति ने इंटरनेट मीडिया पर पोस्‍ट कर बताया है कि आरटीपीसीआर की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के 20 दिनों बाद उन्‍हें जिला प्रशासन की ओर से मेडिकल किट उपलब्‍ध कराया गया। इस मामले की जांच अपर समाहर्ता कर रहे हैं।

Vyas ChandraTue, 11 May 2021 11:40 AM (IST)

गया, जागरण संवाददाता। अक्‍सर डाक के काफी विलंब से आने की शिकायतें मिलती रहती थीं। कई बार महीनों बाद पत्र मिला करते थे। लेकिन यहां तो मेडिकल किट पहुंचने की रफ्तार ने डाक विभाग को भी फेल कर दिया। मेडिकल वाला मामला इमरजेंसी का होता है। खासकर कोरोना रोगियों के लिए समय पर उपचार जरूरी होता है।लेकिन यहां जिला प्रशासन ने रिकार्ड बना दिया। मामला तब सामने आया जब मुदस्सिर आलम ने फेसबुक पर अपनी पीड़ा बयां की। बहरहाल अपर समाहर्ता स्‍तर से इसकी जांच की जा रही है।  

जांच के 20 दिनों बाद मिली मेडिकल किट 

मुदस्सिर आलम ने फेसबुक पर पोस्ट किया कि 15 अप्रैल को उन्‍होंने अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (Anugrah Narayan Magadh Medical College and Hospital) में आरटीपीसीआर जांच (RTPCR Test) कराई थी। इसमें उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद वे होम आइसोलेशन में थे। वे तब दवा लाने गए जब वे बीमार थे। दवाखाकर ठीक भी हो गए। उन्होंने बताया कि उनके संक्रमित होने के 20 दिनों के बाद आठ मई को जिला प्रशासन की ओर से मेडिकल किट नगर निगम की कर्मी के माध्यम से उपलब्ध कराया गया। क्‍या यह स्थिति ठीक है।

15 को नहीं 28 को हुई थी जांच 

हालांकि जिला प्रशासन 17 अप्रैल को जांच की बात से इन्‍कार कर रहा है। वहां की सूची में जांच की तिथि 28 अप्रैल बताई गई है। इस संबंध में प्रभारी पदाधिकारी, जिला आपदा शाखा ने बताया गया कि मुदस्सिर आलम का सैंपल अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में दिनांक 28 अप्रैल को लिया गया था। इसके बाद 30 अप्रैल को आरटीपीसीआर जांच में पॉजिटिव लोगों की सूची स्वास्थ्य विभाग ने उपलब्ध कराई। जांच रिपोर्ट उपलब्ध होने के बाद सभी पॉजिटिव लोगों का फोन से हालचाल लिया गया। एक मई को जिला प्रशासन ने नगर निगम के कर्मियों के माध्यम से मेडिकल किट निर्धारित पते पर भेजवाया। अब आठ मई को मुदस्सिर आलम को मेडिकल किट प्राप्त हुआ। इस विलंब के लिए कौन ज़िम्मेदार है, इसकी जांच अपर समाहर्ता के स्तर से की जा रही है।

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