घी के 1100 दीये से जगमग हो उठा कैमूर स्थित माता मुंडेश्‍वरी मंदिर, की गई विशेष पूजा-अर्चना

देश के प्राचीन आदिशक्ति पीठ के रूप में विख्यात माता मुंडेश्वरी का मंदिर दीपावली की रात दीये की रोशनी में जगमगा उठा। घी के दीये के साथ ही रंगबिरंगी लाइट से यहां की दिव्‍यता देखते ही बनती थी।

Vyas ChandraFri, 05 Nov 2021 08:32 AM (IST)
माता मुंडेश्‍वरी के समक्ष जलाए गए दीये। जागरण

भगवानपुर (कैमूर), संवाद सूत्र। देश के प्राचीन आदिशक्ति पीठ के रूप में विख्यात माता मुंडेश्वरी का मंदिर दीपावली की रात दीये की रोशनी में जगमगा उठा। घी के दीये के साथ ही रंगबिरंगी लाइट से यहां की दिव्‍यता देखते ही बनती थी। दीपावली की रात माता की विशेष पूजा-अर्चना भी की गई। दूर-दूर के लोग यहां माता के दर्शन को पहुंचे। यहां दीपावली की रात घी के 11 सौ दीये जलाए जाते हैं। 

धार्मिक न्‍यास समिति की ओर से की गई सजावट 

भगवानपुर प्रखंड के पवरा पहाड़ी की चोटी पर स्थित माता के मंदिर परिसर को धार्मिक न्यास समिति की ओर से  लाइटों से सजाया गया। साथ ही नीचे से लेकर ऊपर तक घी के दीये जलाए गए। घी के दीये जलाने के समय मां मुंडेश्वरी के मंदिर में आसपास के श्रद्धालु के अलावा समिति के कर्मी उपस्थित थे। मां मुंडेश्वरी की आरती के बाद घी के दीये जलाए गए। घी के दीये आइबी म्यूजियम तथा पवरा पहाड़ी के आसपास जलाए गए। दीये से पूरा पहाड़ी जगमग कर रहा था। बता दें कि एक तरफ सभी लोग अपने घरों में दीये जलाकर मां लक्ष्मी कुबेर का पूजन करने में जुटे हुए थे तो वहीं श्रद्धालु प्रखंड के सभी गांव में देव स्थान पर दीये जलाकर अपनी सुख शांति की कामना कर रहे थे।  बताया जाता है कि प्रत्येक वर्ष धार्मिक न्यास समिति के द्वारा मां मुंडेश्वरी में दीपावली के दिन  11 सौ से अधिक घी के दीये जलाने की परंपरा चली आ रही है।

रुक्‍म‍िणी-कृष्‍ण का विवाह प्रसंग सुन विभोर हुए लोग 

मोहनियां नगर के वैद्या होटल में सरोज मिश्रा द्वारा आयोजित भागवत कथा में रामानुजाचार्य भागवत भूषण डॉ पुंडरीक शास्त्री ने रुक्मिणी श्रीकृष्ण विवाह व कृष्ण सुदामा चरित्र प्रसंग सुनाया। रुक्मिणी विवाह की कथा सुन महिलाएं गदगद हो गई। पुंडरीक महाराज ने कहा कि भगवान के विवाह का प्रसंग सुनाने वालों के घर में सदा मंगल रहता है। बच्चे बच्चियों के शादी में कोई बाधा नहीं आती। सुदामा जी का चरित्र श्रवण करने से भगवान भक्तों के अधीन हो जाते हैं। जो भक्त इस ब्राह्मण भक्ति को सुनता है व कर्म वचन से मुक्त होकर भगवान के दरबार में परम पद को प्राप्त करता है। सुदामा जी भगवान श्री कृष्ण के परम मित्र थे। 

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