राजद विधायक के पुत्र नहीं जीत सके जिला परिषद का चुनाव, कैमूर के चैनपुर में रह गए काफी पीछे

कैमूर के चैनपुर प्रखंड से जिला परिषद की दोनों सीटों पर नए चेहरे काबिज हुए हैं। एक तो सदस्‍य के निधन के कारण रिक्‍त था लेकिन दूसरी सीट पर निवर्तमान प्रतिनिधि को हार का मुंह देखना पड़ा है। इस क्रम में राजद विधायक के पुत्र भी चुनाव हार गए।

Vyas ChandraMon, 11 Oct 2021 11:36 AM (IST)
जिला परिषद चुनाव में राजद विधायक के बेटे की हार। सांकेतिक तस्‍वीर

कैमूर, जागरण संवाददाता। कैमूर जिले के मोहनियां अनुमंडल मुख्यालय में स्थित बाजार समिति में रविवार को हुई मतगणना में चैनपुर प्रखंड के दोनों जिला परिषद सीट पर नए चेहरे निर्वाचित हुए। चैनपुर भाग एक से अखिलेश कुमार चौरसिया तो भाग दो से बुल्‍लू राम निर्वाचित घोषित किए गए। अखिलेश कुमार चौरसिया ने राजद विधायक भरत बिंद के पुत्र संजय कुमार बिंद को पराजित कर दिया। वहीं बुल्‍लू राम ने निवर्तमान जिप सदस्‍य आलोक रावत को शिकस्‍त दी। 

19 प्रत्‍याशी थे मैदान में, विधायक के पुत्र को मिले 1858 मत 

चैनपुर भाग एक से कुल 19 प्रत्‍याशी मैदान में थे। इनमें अखिलेश कुमार सिंह को कुल 5776 मत मिले। जबकि प्रतिद्वंद्वी रूकमिणी देवी को 3822 मत मिले। राजद विधायक के पुत्र संजय कुमार बिंद को महज 1858 मतों से संतोष करना पड़ा। हालांकि उनसे भी कम मत प्राप्त करने वाले प्रत्याशी चैनपुर भाग एक में हैं। लेकिन कैमूर जिले के दिग्गजों के प्रचार करने के बावजूद भी विधायक के पुत्र की यह हार चर्चा का विषय बनी हुई है। अन्‍य उम्‍मीदवारों की बात करें तो विधायक पुत्र से ज्‍यादा मत पाने वालों में जुबैर शाह को 3114, दाउ ठाकुर को 2221, अनीता कुमारी को 3086, दिलीप कुमार को 2715, महेंद्र नोनिया को 2295, नियाजुद्दीन अंसारी को 1965, रामएकबाल प्रसाद को 3227 औरा सरफराज आलम को 2553 मत प्राप्‍त हुए। 

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निवर्तमान जिला परिषद सदस्‍य को मिली हार 

वहीं चैनपुर भाग दो के बुल्लू राम को कुल 9095 मत मिले। जबकि प्रतिद्वंद्वी आलोक रावत को 8229 मत मिले। चैनपुर प्रखंड की जिला परिषद सीट पर जनता ने नए लोगों को मौका दिया है। चैनपुर भाग एक की सीट तत्कालीन जिला परिषद सदस्य के निधन के बाद रिक्त थी। जबकि भाग दो के उप विजेता आलोक रावत ही पूर्व में जिप सदस्य थे। लेकिन उनको इस बार जनता ने नकार दिया।  बता दें कि इस बार हुए पंचायत चुनाव में कई निवर्तमान जनप्रतिनिधि पूर्व हो गए हैं। अधिकांश को हार का मुंह देखना पड़ा है। 

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