Gaya: सोते रहे डॉक्‍टर, चीखता रहा मरीज और हो गई मौत, फिर ऐसे किया ग्रामीणों ने कि उड़ गए होश

गया के वजीरगंज सीएचसी में कार्यरत चिकित्सक ने किए ऐसे कारनामे कि पैदल चलकर अस्पताल आए एक व्यक्ति मुर्दा बनकर वापस गया। सोमवार की सुबह करीब तीन बजे मीरगंज का रंजीत भगत जिसकी उम्र 42 वर्ष थी। घर में कोहराम मच गया है।

Prashant KumarTue, 27 Jul 2021 11:59 AM (IST)
सर्पदंश से युवक की मौत के बाद हंगामा। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

संवाद सूत्र (गया) वजीरगंज। गया के वजीरगंज सीएचसी में कार्यरत चिकित्सक  ने किए ऐसे कारनामे कि पैदल चलकर अस्पताल आए एक व्यक्ति मुर्दा बनकर  वापस गया। सोमवार की सुबह करीब तीन बजे मीरगंज का रंजीत भगत जिसकी उम्र 42 वर्ष थी। वह पैदल चलकर अपनी चिकित्सा करवाने अस्पताल पहुंचे। उसे सोए अवस्था में किसी विषधर ने काट लिया था।

अस्पताल में डयूटी पर रहे  तब ड्यूटी रूम से अलग दूसरे रूम में सो रहे थे। सहायक स्वास्थ्यकर्मी एवं खुद रंजीत तथा उसके स्वजनों द्वारा चिकित्सक को जगाने का काफी प्रयास किया गया, लेकिन वे नहीं जागे। उनको जगाते हुए करीब दो घंटे समय बीत जाने पर रंजीत की तबियत बिगड़ने लगी तब भी चिकित्सक आराम फरमाते रहे और रूम में पुर्जे मंगवाकर कुछ दवाइयां बिना देखे लिख दिए, तब तक रंजीत अचेत हो चुका था।

उसकी हालत खराब होते देख किसी अनहोनी की आशंका से साथ मे रहे स्वजन विचलित होने लगे। इसकी सूचना आराम फरमा रहे चिकित्सक को मिली तब वे सयन कक्ष से बाहर निकले और हार्ड अटैक की बात बोलकर बिना कोई प्राथमिक चिकित्सा किए मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल गया के लिए रेफर कर दिया। परिवार वाले किसी प्रकार मेडिकल अस्पताल ले गए जहां इलाज शुरू होते ही उसकी मौत हो गई। इस प्रकार श्रावण मास के पहली सोमवारी को जब स्त्रियां भगवान शिव की आराधना में लगी थी तभी एक महिला का सुहाग छीन लिया गया।  मगध मेडिकल में इस व्यक्ति की मौत सर्पदंश से होने की पुष्टी की गई है।

सूत्र के अनुसार वजीरगंज सीएचसी में सर्पदंश के इलाज की सम्पूर्ण सुविधा उपलब्ध है, इस बात को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ0 नंदलाल प्रसाद भी करते हैं। तो स्पस्ट है कि यदि डॉ0 सुमन कुमार नींद के आगोश से समय पर बाहर निकल जाते तो शायद रंजीत की मौत नहीं होती। उसकी मौत के बाद स्वजन एवं ग्रामीण काफी आक्रोशित हो गए और शव को लेकर वजीरगंज सीएचसी पहुंचकर उक्त चिकित्सक के विरुद्ध प्रदर्शन करने लगे। अस्पताल परिसर में तोड़ फोड़ एवं भारी हंगामा मचाए। वे सीधे डॉ. सुमन कुमार को खोज रहे थे, लेकिन कुछ देर पहले ही अस्पताल से बाहर चले गए थे।

कोपभाजन के शिकार प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नंदलाल प्रसाद को होना पड़ा। दिवंगत रंजीत के छोटे- छोटे संतानो पर मातम के साथ भारी आक्रोश था। बेटियां मानो अपने असमय खो देने के वियोग में कालिका का रूप धारण कर ली थी। कई घंटे तक अस्पताल परिसर में  घूम घूमकर डॉ. सुमन को खोजते रहे और तोड़ -फोड़ के साथ उत्पात मचाते रहे। पुलिस को सूचना मिलने पर जब वे पहुचे और उत्पात रोकने का प्रयास किया तो वे उनसे भी उलझ गए।

बेटियों को अपने सिर से पिता का साया उठने का भारी गम था, लेकिन वे आक्रोशित थी। समझाने वाले पुलिसकर्मियों को वे कह रही थी कि मेरे पिता पैदल चलकर अस्पताल आए थे, मुझे मेरे पिता लौटा दो मैं उनके साथ पैदल यहाँ से वापस चली जाऊंगी। लेकिन, चिकित्सक डॉ0 सुमन कुमार तो इसके प्राण हरकर कबके प्रस्थान कर चुके थे। अब तो इसके प्राण लौटाना किसी दूसरे के वश की बात नहीं थी, इसलिए विवश होकर देर रात तक इनके आक्रोश झेलते रहे।इस बीच अस्पताल को भारी क्षति हुई।

कई दरवाजे एवं फर्नीचर तोड़ दिए गए। ग्रामीणों एवं रंजीत के स्वजनों का मानना था कि यदि अस्पताल में इलाज होते हुए उसकी मौत हो जाती तब हम इसे अपनी नियति मान लेते, लेकिन इलाज किया ही नहीं गया तो इसे क्या समझें। ग्रामीण ऐसे लापरवाह और जानलेवा चिकित्सक पर कठोर कार्रवाई कर बर्खास्त करने की मांग कर रहे थे।

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