गया के सॉल्‍वर यूपी में पास करा रहे थे टीईटी परीक्षा, प्रयागराज की पुलिस ने छह को धर दबोचा

उत्तरप्रदेश पुलिस ने प्रयागराज में रविवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार के सॉल्‍वर गैंग का खुलासा किया है। बिहार और यूपी के सॉल्‍वर अभ्‍यर्थियों को उत्तरप्रदेश टीईटी परीक्षा पास करवा रहे थे। इसकी भनक प्रयागराज पुलिस को लग गई और उन्‍होंने गिरोह के 16 शातिरों को धर दबोचा।

Prashant KumarSun, 28 Nov 2021 05:56 PM (IST)
यूपी पुलिस ने गया के छह सॉल्‍वर को किया गिरफ्तार। सांकेतिक तस्‍वीर।

ऑनलाइन डेस्‍क, गया। उत्तरप्रदेश पुलिस ने प्रयागराज में रविवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार के सॉल्‍वर गैंग का खुलासा किया है। बिहार और यूपी के सॉल्‍वर अभ्‍यर्थियों को उत्तरप्रदेश टीईटी परीक्षा पास करवा रहे थे। इसकी भनक प्रयागराज पुलिस को लग गई और उन्‍होंने गिरोह के 16 शातिरों को धर दबोचा। इनमें आठ सॉल्‍वर बिहार के गया जिले के रहने वाले हैं। हालांकि, इनका मुख्‍य सरगना यूपी के प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज थानांतर्गत दुर्गागंज निवासी राजेंद्र पटेल है। वहीं, प्रयागराज में गिरोह का संचालन वहीं के कोरांव थानांतर्गत पचवह खजुरी गांव निवासी अजय कुमार के रूप में हुई है। राजेंद्र और अजय भी पुलिस के हत्‍थे चढ़ गए हैं।

प्रयागराज पुलिस के मुताबिक, सन्‍नी सिंह, टिंकू कुमार, शीतल कुमार, धनंजय कुमार, कुनैन राजा और शिवदयाल की गिरफ्तारी हुई है। ये सभी बिहार के रहने वाले हैं। शिवदयाल औरंगाबाद जिले के बारूण थानांतर्गत धुरिया गांव का निवासी बताया जाता है, जबकि टिंकू, शीतल और कुनैन बोधगया के रहने वाले हैं। वहीं सन्‍नी गया जिले के खराटी बदगाहा और धनंजय मुफस्सिल थानांतर्गत धर्मदेव नगर मानपुर का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, ये सभी दूसरे के बदले बैठकर टीईटी की परीक्षा दे रहे थे। सरगना राजेंद्र ने इन्‍हें मोटी रकम दी थी। गिरफ्तार आरोपितों का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है। पता लगाया जा रहा है कि इन्‍होंने इससे पहले कितनी परीक्षाएं दूसरे के बदले दीं।

इसी कड़ी में एक शिक्षक को भी गिरफ्तार किया गया है। उसकी पहचान प्रयागराज जिले के शंकरगढ़ थानांतर्गत वार्ड नंबर नौ पटेल नगर निवासी सत्‍य प्रकाश सिंह के रूप में हुई है। वह करियाखुर्द शंकरगढ़ प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्‍यापक है। सत्‍य प्रकाश के मोबाइल पर वाट्सएप के माध्‍यम से पेपर सॉल्‍व कर भेजता था। अभ्‍यर्थियों से स्‍कॉलर बैठाने के लिए पांच लाख रुपये तक लिए जाते थे। वहीं, सॉल्‍वर को प्रति अभ्‍यर्थी एक लाख रुपये तक मिलता था। पुलिस गिरोह के दूसरे सदस्‍यों के भी ठिकाने तलाश रही है।

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