निर्जला एकादशी व्रत आज, लोगों विष्‍णुपद मंदिर के बंद पटों पर ही कर रहे पूजा, देखें पूजा व पारण का समय

भीमसेन एकादशी पर श्रद्धालु 24 घंटे बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखते हैं। द्वादशी तिथि में स्नान कर पारण करेंगे। कोरोना काल मे विष्णु पद मंदिर बंद हैं। परंतु लोग मुख्य द्वार पर पूजापाठ कर रहे है। जानिए पूजा व पारण का शुभ मुर्हूत ।

Sumita JaiswalMon, 21 Jun 2021 08:14 AM (IST)
गया के फल्‍गु नदी में निर्जला एकादशी पर डुबकी लगाते श्रद्धालु, सांकेतिक तस्‍वीर ।

गया, जागरण संवाददाता। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इस बार निर्जला एकादशी आज 21 जून, सोमवार को है। इसे भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है। श्रद्धालु 24 घंटे बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखते हैं। व्रत का पारण दूसरे दिन द्वादशी तिथि में स्नान करने के बाद किया जाता है। फल्गु नदी मे लोग डूबकी लगा रहे है। कोरोना काल मे विष्णु पद मंदिर बंद हैं। परंतु लोग मुख्य द्वार पर पूजापाठ कर रहे है।

आचार्य लालभूषण मिश्र याज्ञिक कहते हैं कि निर्जला एकादशी व्रत कठोर तपस्या है। इससे विष्णुलोक की प्राप्ति साथ नरक के कष्ट से बचाव हो जाता है। इस व्रत में भगवान श्रीहरि विष्णु अथवा शालीग्राम शिला को स्नान कराकर जल को पान किया जाता है। इससे अकाल मृत्यु नहीं होती है और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

एकादशी व्रत का पारण

एकादशी व्रत का पारण अगले दिन किया जाता है। मान्यता है कि व्रत का पारण सूर्योदय के बाद करना चाहिए। व्रत का पारण द्वादशी की तिथि समाप्त होने से पहले करना ही श्रेष्ठ होता है। द्वादशी की तिथि यदि सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाए तो व्रत का पारण सूर्योदय के बाद करना चाहिए।

एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त

निर्जला एकादशी तिथि- 21 जून 2021

एकादशी तिथि प्रारंभ- 20 जून, रविवार को शाम 4 बजकर 21 मिनट से शुरू।

एकादशी तिथि समापन:- 21 जून, सोमवार को दोपहर 1 बजकर 31 मिनट पर।

एकादशी व्रत का पारण- 22 जून, सोमवार सुबह 5 बजकर 13 मिनट से 8 बजकर 01 मिनट तक।

काफी मात्रा में जल का होता संचय

निर्जला एकादशी में काफी मात्रा में जल संचय होता है। निर्जला एकादशी आध्यामिक और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस भीषण गर्मी में जलसंकट अधिक होता है। अगर एक दिन लोग बिना जल के सेवन रहेंगे तो काफी मात्रा में पानी की बचत होगी। साथ ही गर्मी लोगों को पाचन क्रिया कमजोर होता है। क्योंकि जिस तरह वाहनों पार्ट होते है उसी तरह शरीर में कई अंग। एक दिन अन्न जल छोडऩे से शरीर स्वस्थ होता है।

मिट्टी के बर्तन की जमकर बिक्री

निर्जला एकादशी को लेकर बाजार में मिट्टी के बने घड़े, सुराही, चुक्का, प्याली आदि की बिक्री खूब हो रही है। श्रद्धालुओं ने जरूरत के अनुसार मिट्टी के जलपात्र की खरीदारी कर रहे है। व्रत पर मिट्टी के बर्तन जल भरकर दान किया जाता है। इससे शीतलता प्रदान करने की मान्यता है। साथ ही श्रद्धालु ताड़ के पत्ते के बना पंखा भी दान करते हैं।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.