बिस्कोमान पर कई दिनों तक कतार में लगने के बाद भी नहीं मिला खाद, निराश होकर लौटे कैमूर के किसान

कुदरा बिस्कोमान के प्रभारी बताते हैं कि मात्र 1000 बोरी यूरिया खाद आई हुई थी जो 3 दिनों में समाप्त हो गई। यूरिया के लिए किसानों को इतनी परेशानी उठानी पड़ी है कि कई दिन कतार में लगने के बाद भी खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है।

Prashant KumarTue, 14 Sep 2021 05:36 PM (IST)
खेत में खाद छिड़क रहा किसान। जागरण आर्काइव।

संवाद सूत्र, कुदरा (भभुआ)। कुदरा प्रखंड के किसानों में यूरिया खाद के लिए हाहाकार मचा हुआ है। किसान सारा काम छोड़कर जहां-तहां यूरिया के लिए भटक रहे हैं फिर भी वह उन्हें नहीं मिल पा रही है। यहां की सहकारी संस्थाओं में मात्र एक बिस्कोमान के द्वारा यूरिया का वितरण किया जा रहा है। लेकिन वहां भी स्थिति यह है कि कई दिनों के बाद यूरिया की कोई खेप आती है और दो-तीन दिनों में समाप्त हो जाती है। मंगलवार को कुदरा के बिस्कोमान में किसानों को बेचने के लिए एक बोरी भी यूरिया खाद नहीं है। सोमवार को आधी रात से ही किसानों ने वहां यूरिया के लिए कतार लगा रखी थी लेकिन जब दिन में सहकारी संस्था का कार्यालय खुला तो दो चार लोगों को खाद देकर उसके समाप्त होने की घोषणा कर दी गई।

कुदरा बिस्कोमान के प्रभारी अरुण कुमार इस संबंध में बताते हैं कि मात्र 1000 बोरी यूरिया खाद आई हुई थी जो 3 दिनों में समाप्त हो गई। यूरिया के लिए किसानों को इतनी परेशानी उठानी पड़ी है कि कई दिन कतार में लगने के बाद भी खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है। इसमें उनके समय श्रम और धन तीनों की हानि हो रही है। सकरी गांव के संजय पाल की पत्नी ज्ञानती देवी बताती हैं कि वे बिस्कोमान पर सोमवार को 4:00 बजे भोर से दिन के 2:00 बजे तक कतार में रहीं, लेकिन खाद नहीं मिली। दो दिन पहले भी यूरिया खाद के लिए बिस्कोमान पर कतार में लगी थीं लेकिन खाद तो नहीं मिली उल्टे उनके पास मौजूद 540 रुपए उचक्को ने उड़ा लिए। उसी गांव के विजय पासवान बताते हैं कि कुदरा में यूरिया नहीं मिला तो उन्होंने समीप के जिले रोहतास के शिवसागर में जाकर ब्लैक में खाद खरीद कर काम चलाया।

बड़का रामडीहरा गांव के मनोज कुमार बताते हैं कि बिस्कोमान पर 2:00 बजे रात से ही कतार में लगे रहे लेकिन फिर भी खाद नहीं मिली। अब ब्लैक में भी खाद खरीदने को तैयार हैं लेकिन ब्लैक में भी दुकानदार जान-पहचान वालों को ही खाद दे रहे हैं। किसानों की मानें तो सबसे पीड़ादायक बात यह है कि किसानों की इतनी बड़ी परेशानी के बावजूद उनके हिमायती होने का दावा करनेवाले लोग इसके लिए कुछ भी नहीं कर रहे हैं। पिछले दिनों कुदरा में कई बड़े राजनेताओं का संबोधन व अभिनंदन हुआ लेकिन किसानों का हिमायती बनने वालों में से किसी ने यूरिया की किल्लत का मुद्दा उठाने की जरूरत नहीं समझी।

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