Gaya News: गोदाम प्रबंधक पर कालाबाजारी का आरोप लगा किसानों ने हंगामा किया

गया में खाद की बरकार किल्लत के बीच रविवार को बिस्कोमान कृषक सेवा केंद्र पर कुछ किसानों ने गोदाम प्रबंधक पर कालाबाजारी का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मामले की शिकायत बीएओ से करते हुए मामले की जांच कर दोषी लोगों के विरुद्ध करवाई की मांग की है।

Mon, 27 Sep 2021 12:04 AM (IST)
बिस्कोमान कृषक सेवा केंद्र पर हंगामा करते किसान, जागरण फोटो।

गया,जागरण संवाददाता। खाद की बरकार किल्लत के बीच रविवार को बिस्कोमान कृषक सेवा केंद्र पर कुछ किसानों ने गोदाम प्रबंधक पर कालाबाजारी का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। उक्त मामले की शिकायत बीएओ से करते हुए मामले की जांच कर दोषी लोगों के विरुद्ध करवाई की मांग की है। गोपाल कुमार सहित अन्य किसानों ने कहा कि बिस्कोमान के उर्वरक बिक्री केंद्र पर गलत ढंग से अधिक कीमत पर खाद की बिक्री की जा रही है।

उधर, गोदाम प्रबंधक शंकर कुमार ने किसानों के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। वहीं गोपाल ने बताया कि यूरिया खाद समय से नही मिलने के कारण फसल बर्बाद होने के भय से किसान मजबूरन ब्लैक में खाद खरीदने के मजबूर हैं।

उत्पादन का सही मूल्य लेने के लिए बनाना होगा समूह

गया के मानपुर में आजादी का अमृत महोत्सव के अन्तर्गत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण निर्यात विकास प्राधिकरण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय भारत सरकार की ओर से व्यापार सम्मेलन विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वाणिज्य उत्सव का सीधा प्रसारण वाराणसी की ओर से कृषि विज्ञान केंद्र मानपुर में किया गया। वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डाॅ राजीव सिंह ने कहा कि किसान अपने उत्पादन का सही मूल्य लेना चाहते हैं तो कृषक उत्पादक समूह बनाएं। उसके बाद किसानों का उत्पादन का सही मूल्य मिलना शुरू हो जाएगा।

कृषि विज्ञानी डाॅ. अशोक कुमार ने कहा कि किसान उत्पादन कर बाजार में बिक्री करने जाते हैं। जहां उन्हें सही मूल्य नहीं मिलता है। अगर समूह बनाकर बृहत पैमाने पर उत्पादित सामग्री की बिक्री होगी तो किसानों को बेहतर फायदा होगा। किसानों द्वारा बनाई गई समूह को सरकार द्वारा सहयोग भी किया जाता है। जिससे किसान विभिन्न तरह के कृषि यंत्र व अन्य कृषि से संबंधित सामग्री खरीद सकते हैं। नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक उदय कुमार ने कृषक उत्पादक समूह बनाने के बारे में विस्तार से बताया। उक्त समूह को सरकार द्वारा कैसे लाभ मिलेगी इसके बारे में भी जानकारी दिया। उन्होंने कहा कि समूह को तीन साल बाद सरकार द्वारा 11.44 लाख रुपये की सहयोग दी जाएगी। पांच साल की प्रति रिपोर्ट देखने के बाद पुन: समूह को 22 लाख का सहयोग दिया जाएगा।

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