Dhanteras 2021: धनतेरस आज, खरीदारी के हैं कई शुभ मुहूर्त, पूरी रात भी कर सकेंगे खरीदारी

इस वर्ष धनतेरस का मुहूर्त 2 नवम्बर को प्रात 1131 बजे से शुरू होगा। धनतेरस के अवसर पर शुभ लाभ एवं अमृत चौघडिय़ा में स्फटिक श्रीयंत्र का क्रय करना भी परिवार के सुख-शांति एवं समृद्धि के लिए उत्तम होता है। जानिए किस समय करें खरीदारी।

Sumita JaiswalTue, 02 Nov 2021 09:23 AM (IST)
इस दिन धन का अपव्यय नहीं किया जाता, सांकेतिक तस्‍वीर।

गया, जागरण संवाददाता। पंच दिवसीय ज्योति पर्व का प्रथम दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। इसे धनवंतरी त्रयोदशी भी कहां जाता है। इस वर्ष धनतेरस का मुहूर्त 2 नवम्बर को प्रात: 11:31 बजे के उपरांत प्रारंभ होगा जो 3 नवंबर के प्रात: 9 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में सुबह 11:34 बजे से लेकर 12:57 दोपहर अमृत चैाघडिय़ां रहने के कारण यह समय उत्तम मुहूर्त है। इसके उपरांत संध्या 6:45 बजे से रात 8 बजकर 21 मिनट तक लाभ चौघडिया रहने के कारण इस समय खरीद होने पर वस्तु लम्बे समय तक घरवाले को लाभ देते रहेगा। खासकर रात 9:57 बजे से लेकर 11:34 बजे तक शुभ चौघडिया रहने के कारण इस अवधि में क्रय किया हुआ वस्तु की शुभता दीर्घ काल तक बनी रहेगी। रात 11:34 बजे से लेकर रात 12:10 बजे मिनट तक क्रय किया हुआ वस्तु अमृत तुल्य फल देनेवाला साबित होगा।

धनतेरस में घर में नई चीज खासकर बर्तन, सोना-चांदी, सिक्के, वाहन, व्यवसायिक वाहन, भूमि, भवन, फ्लैट, भूमि आदि का क्रय करने का विधान या परंपरा है। साथ ही लक्ष्मी-गणेशजी की मूर्ति, सोने-चांदी एवं स्फटिक का श्री यंत्र भी इन्ही मुहूर्त में खरीदे तो उत्तम रहेगा। धनतेरस के अवसर पर शुभ, लाभ एवं अमृत चौघडिय़ा में स्फटिक श्रीयंत्र का क्रय करना भी परिवार के सुख-शांति एवं समृद्धि के लिए उत्तम होता है। साथ ही इससे भवन में उपस्थित वास्तु दोष का निवारण स्वत: होते रहता है, और घर में निरंतर शुभ एवं अलौकिक उर्जा का प्रवाह होते रहता है। फलस्वरूप  घर में वास करने वाले लोग पूर्ण रूप से दिव्य एवं अलौगिक शक्तियों का लाभ मिलते रहता है।

एस्‍ट्रोलोजिक्कल प्वाइंट के उपाध्यक्ष एआईएफएएस सह चेयरमैन प्रमोद कुमार सिन्हा ने बताया कि इस दिन धन का अपव्यय नहीं किया जाता तथा किसी को उधार भी नहीं दिया जाता है। इसलिए कुछ लोग खासकर व्यापार में लेन-देन करने से भी बचते है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन धन का अपव्यय रोकने से अगले वर्ष धन का संचय होता है। इस दिन आयुर्वेद के प्रवर्तक धन्वन्तरि की जयंती भी मनाई जाती है।

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