जयंती विशेष: देशरत्न राजेंद्र बाबू ने किया था डालमियानगर कागज कारखाना का उद्घाटन, प्रतिदिन इतने कागज का होता था उत्पादन

राजेंद्र प्रसाद ने आजादी से पहले चार अप्रैल 1939 को रोहतास उद्योग समूह परिसर में देश के सबसे बड़े कागज कारखाना का उद्घाटन किया था। उस वक़्त वो कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता थे। 1984 में रोहतास इंडस्ट्रीज बंद हो गया। 2007 में रेलवे ने इंडस्ट्रीज को क्रय कर लिया।

Prashant Kumar PandeyThu, 02 Dec 2021 06:20 PM (IST)
देशरत्न डॉ. राजेंद्र बाबू की तस्वीर, जागरण आर्काइव

 संवाद सहयोगी, डेहरी आनसोन : रोहतास। देश के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डा. राजेंद्र प्रसाद की स्मृति को संजोए डालमियानगर कागज कारखाने का ढांचा अब भले ही जमींदोज हो चुका है, लेकिन आज भी स्थानीय लोगो की जेहन में उनकी यादें मौजूद हैं। राजेंद्र प्रसाद ने आजादी से पहले चार अप्रैल 1939 को रोहतास उद्योग समूह परिसर में देश के सबसे बड़े कागज कारखाना का उद्घाटन किया था। उस समय वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता थे। 1984 में रोहतास इंडस्ट्रीज बंद होकर परिसमापन में चला गया। 2007 में रेलवे ने इंडस्ट्रीज को क्रय कर लिया। रेलवे द्वारा क्रय किए जाने के बाद रोहतास इंडस्ट्रीज का सुनहरा अतीत जमींदोज हो गया। वहां अब रेल वैगन मरम्मत, निर्माण व काप्लर कारखाना लगाने की प्रक्रिया चल रही है।

डालमियानगर का कागज कारखाना जो अब रेलवे की संपत्ति है

देश में प्रतिदिन तीन टन कागज का होता था उत्पादन

बताते चलें कि प्रख्यात उद्योगपति रामकृष्ण डालमिया ने यहां 1933 में पहले चीनी कारखाना लगाया था। इसके बाद यहां उद्योगों का विस्तार प्रारंभ हुआ। 219 एकड़ के विशाल परिसर में सीमेंट, कागज, वनस्पति, साबुन, कास्टिक सोडा, केमिकल व एसबेस्टस के कारखाने खड़े हो गए। तब इसकी गिनती एशिया के सबसे बड़े उद्योग समूह में होने लगी। शाहाबाद गजेटियर के अनुसार चार अप्रैल 1939 को डा. राजेन्द्र प्रसाद ने कागज कारखाना का उद्घाटन किया था। देश में प्रतिदिन तीन टन कागज उत्पादन करने वाला यह पहला कारखाना था। 

टाटा के बाद दूसरे सबसे बड़े उद्योगपति थे रामकृष्ण डालमिया

अविभाजित बिहार में टाटा के बाद दूसरे सबसे बड़े उद्योग समूह में इसकी गिनती होती थी। इसके मालिक उद्योगपति रामकृष्ण डालमिया का देश के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डा. राजेंद्र प्रसाद, बसावन सिंह, अनुग्रह नारायण सिंह समेत अन्य स्वतंत्रता सेनानियों से मधुर संबंध थे। स्वतंत्रता आंदोलनकारियों को वे तन, मन, धन से सहयोग करते थे। इसके पूर्व मार्च 1938 में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने यहां सीमेंट कारखाने का भी उद्घाटन किया था।

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