बिहार: काफी दिनों से नारकोटिक्स ब्यूरो के रडार पर था अकोल्‍ही का मुखिया मनोज गुप्ता, हेरोइन की तस्‍करी में गिरफ्तार

मुखिया मनोज कुमार गुप्ता काफी दिनों से यूपी से बिहार लाकर हेरोइन की तस्करी कर रहा था। उसको नारकोटिक्स ब्यूरो ने रडार पर रखा था। जैसे उसकी लग्जरी गाड़ी हेरोइन व अन्य मादक पदार्थों के साथ औरंगाबाद से पटना के लिए निकली रिसीवर-तस्कर को एक साथ दबोच लिया गया।

Sumita JaiswalThu, 29 Jul 2021 10:03 AM (IST)
मुखिया मनोज कुमार गुप्ता को 280 ग्राम हेरोइन व हथियार के साथ गिरफ्तार, लग्‍जरी गाड़ी जब्‍त, सांकेतिक तस्‍वीर।

रामगढ़, (कैमूर), संवाद सूत्र। कैमूर में अभी भी हेरोइन की तस्करी का धंधा फल फूल रहा है। यहां की पुलिस को भले ही सफेदपोश हेरोइन तस्करों की सुराग नहीं मिल रही है लेकिन नारकोटिक्स ब्यूरो ने हेरोइन के तस्करी में शामिल नुआंव प्रखंड के अंकोल्ही पंचायत के मुखिया मनोज कुमार गुप्ता को 280 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार कर पुलिस को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यह गिरफ्तारी मंगलवार की रात औरंगाबाद-पटना रोड में हुई। इसको लेकर नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम काफी दिनों से जैतपुरा निवासी मुखिया मनोज कुमार गुप्ता को रडार पर ले रखी थी। हेरोइन तस्करी के खेल में माहिर इस मुखिया के पास से नारकोटिक्स ब्यूरो पटना की टीम ने 280 ग्राम हेरोइन, 255 ग्राम अल्प्राजोलम और नौ किलोग्राम ब्लैक स्टोन बरामद किया है। इसके साथ ही एक पिस्टल 7.6.2 एमएम का बरामद हुआ है।

 तस्कर मुखिया मनोज के साथ रिसीवर रोहित कुमार भी गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों के पास से अलग अलग लग्जरी गाडिय़ां भी जब्त हुई हैं।

नारकोटिक्स ब्यूरो पटना के इंस्पेक्टर धीरज कुमार ने बताया कि मुखिया मनोज कुमार गुप्ता काफी दिनों से यूपी से बिहार लाकर हेरोइन की तस्करी कर रहा था। उसको नारकोटिक्स ब्यूरो ने रडार पर रखा था। जैसे उसकी लग्जरी गाड़ी हेरोइन व अन्य मादक पदार्थों के साथ औरंगाबाद से पटना के लिए निकली रिसीवर-तस्कर को एक साथ दबोच लिया गया। उनके पास से 4.75 लाख नकदी भी बरामद हुआ है। मुखिया का संबंध यूपी के अपराधियों से भी होने की बात सामने आ रही है। इसको लेकर कई पहलुओं पर भी जांच हो रही है।

2015 के पंचायती चुनाव में राजनीतिक जीवन की शुरुआत की

मुखिया मनोज गुप्ता ने 2015 के पंचायती चुनाव में उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। पंचायत चुनाव में वे मुखिया पद के प्रत्याशी बने और चुनाव जीते। इसके बाद उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा बढऩे लगी। 2021 के पंचायती चुनाव में स्वयं मुखिया और पत्नी जिला परिषद का चुनाव लडऩे वाले थे। इस घटना के बाद आसमान चढ़ी उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा एक ही पल में जमीन पर आ गई। अब पंचायती चुनाव की उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा अधूरी होती दिखाई दे रही है।

 

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