Aurangabad News: अब आसान नहीं ड्राइविंग लाइसेंस पाना, आटोमैटिक ट्रैक पर हो रहे फेल चालक

आए दिन सड़क हादसे बढ़ गए हैं। इसकी कई वजहें हैं। पहला यातायात नियम का पालन नहीं करना। दूसरा लिमिट स्पीड से ज्यादा तेजी में वाहन चलाना। सबसे प्रमुख कारण अप्रशिक्षित चालकों के द्वारा वाहन चलाना। बगैर लाइसेंस पकड़े जाने पर पांच हजार जुर्माना देना होगा।

Prashant KumarFri, 18 Jun 2021 10:27 AM (IST)
ऑटोमैटिक ड्राइविंग ट्रैक पर चल रहा वाहन। जागरण।

जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। आए दिन सड़क हादसे बढ़ गए हैं। इसकी कई वजहें हैं। पहला यातायात नियम का पालन नहीं करना। दूसरा लिमिट स्पीड से ज्यादा तेजी में वाहन चलाना। सबसे प्रमुख कारण अप्रशिक्षित चालकों के द्वारा वाहन चलाना। खासकर ये तीन कारणों पर अंकुश लग जाए तो लाजिमी है कि 50 फीसदी से ज्यादा हादसे पर राेक लग सकती है। ऐसे चालकों पर कार्रवाई करने के लिए कई सख्त नियम बनाए गए। फिर भी चालक यातायात नियमों का पालन नहीं कर पाते हैं। वाहन चलाने के लिए न बेहतर प्रशिक्षण ले पाते हैं, न यातायात नियमों पालन करते हैं।

यहां राज्य का पहला आटोमैटिक टेस्ट ड्राइविंग केंद्र

जिला मुख्यालय के जसोइया मोड़ पर स्थित देश का सातवां यातायात चालक प्रशिक्षण संस्थान एवं राज्य का पहला आटोमैटिक टेस्ट ड्राइविंग संस्थान खोला गया है। इस संस्थान से चालकों को बेहतर वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। चालकों को प्रशिक्षण के दौरान संस्थान के आटोमैटिक ड्राइविंग ट्रैक पर टेस्ट देना होता है। टेस्ट में पास होने के बाद ही जिला परिवहन कार्यालय से ड्राइविंग लाइसेंस निर्गत होता है। स्थिति यह है कि इस टेस्ट में अधिकांश चालक फेल हो जाते हैं। ड्राइविंग टेस्ट में फेल हो जाने के कारण लाइसेंस नहीं बन पाता है।

दूसरे जिला से ज्यादा लाइसेंस बना रहे हैं लोग

ड्राइविंग टेस्ट में फेल होने और ड्राइविंग लाइसेंस निर्गत नहीं होने के कारण स्थिति यह बनी है कि इस जिले के ज्यादातर लोग दूसरे जिले से अपना लाइसेंस बनवा रहे हैं। इस जिले के परिवहन कार्यालय का आंकड़ा देखें तो मार्च 2020 से मई 2021 तक कुल 5948 ड्राइविंग लाइसेंस निर्गत हुआ है। जबकि करीब 11 हजार से अधिक चालकों ने लाइसेंस के लिए आनलाइन आवेदन दिया था। करीब 50 फीसदी चालक आटोमैटिक टेस्ट में फेल हो गए। जिस कारण उनका लाइसेंस नहीं बना।

बिना लाइसेंस के टेंपो व ट्रैक्टर दौड़ाते हैं चालक

सड़क पर दौड़ने वाला अधिकांश वाहन जैसे ट्रैक्टर, टेंपो व पिकअप के चालकों के पास लाइसेंस नहीं होता है। बिना लाइसेंस के वाहन दौड़ाते हैं। जब वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है तो प्राथमिकी दर्ज होने के बाद दूसरे वाहनों के चालक अपनी लाइसेंस पर जमानत कराते हैं। जब परिवहन विभाग एवं पुलिस के द्वारा वाहनों को पकड़ा जाता है। तब भी अधिकांश बाइक चालकों के पास लाइसेंस नहीं होता है। ईंट भट्ठों एवं क्रशर प्लांट पर चलने वाले ट्रैक्टरों एवं अन्य वाहनों को चलाने वाले अधिकांश चालकों के पास लाइसेंस नहीं होता है। जिले में अधिकांश विद्यालय के वाहनों के चालक ऑटोमैटिक ड्राइविंग संस्थान में प्रशिक्षण नहीं लिए हैं। प्रशिक्षण के लिए डीएम एवं डीटीओ के द्वारा सभी निजी विद्यालय के संचालकों को पत्र भी भेजा गया है।

बिना लाइसेंस पकड़े जाने पर 5000 जुर्माना का प्रावधान

सड़क पर बिना लाइसेंस के वाहन चलाते पकड़े जाने पर 5000 रुपये जुर्माना लेने का प्रावधान है। नाबालिग के द्वारा सड़क पर वाहन चलाते पकड़े जाने पर 25 हजार फाइन है। डीटीओ अनिल कुमार सिन्हा ने बताया कि एक वर्ष के अंदर में करीब पांच से छह नाबालिगों के द्वारा वाहन चलाते पकड़ा गया है और जुर्माना लिया गया है।

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