बीज वितरण केंद्र नहीं खुलने से किसानों में आक्रोश, सरकार पर जमकर निकाली भड़ास, यूरिया मिलने के वक़्त भी यही था हाल

किसान अपने पैसों से खाद खरीदने के लिए तैयार हैं। तब भी बाजार में खाद उपलब्ध नहीं है। वहीं स्थिति धान की खेती के समय भी हुई। लंबी-लंबी कतार लगाकर किसान यूरिया खरीदने के लिए सुबह से शाम तक परेशान रहते थे। अब यह हमेशा की समस्या बन गई है।

Prashant Kumar PandeyTue, 23 Nov 2021 05:12 PM (IST)
अधिकारियों और सरकार पर किसानों ने निकाली भड़ास(सांकेतिक तस्वीर)

 संवाद सूत्र, भगवानपुर: स्थानीय प्रखंड के किसान इन दिनों खाद के लिए काफी परेशान हैं। धान की फसल कटने लगी है। गेहूं की बोआई करने का समय है। खेत तैयार है। किसान डीएपी खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं। लेकिन डीएपी खाद दुकानों पर उपलब्ध नहीं है। इसके चलते किसान गेहूं की बोआई नहीं कर पा रहे हैं। बताया जाता है कि जब किसानों को खाद की आवश्यकता है तो सरकार किसानों तक खाद नहीं पहुंचा पा रही है।

किसानों में जबरदस्त नाराजगी

अरारी गांव के किसान राम सूरत सिंह ने बताया कि कई बीघा धान का खेत कट कर तैयार हो गया है। डीएपी खाद नहीं मिलने से गेहूं की बोआई नहीं हो पा रही है। वहीं राधाखाड़ गांव के किसान गोपाल सिंह कहते हैं कि वर्तमान सरकार किसानों की उपेक्षा कर रही है। किसान अपने पैसों से खाद खरीदने के लिए तैयार हैं। उसके बाद भी बाजार में खाद उपलब्ध नहीं है। वहीं स्थिति धान की खेती के समय भी हुई। लंबी लंबी कतार लगाकर किसान यूरिया खरीदने के लिए सुबह से शाम तक परेशान रहते थे। अब यह केवल एक बार की नहीं बल्कि हर बार की समस्या बन गई है। इसे क्या कहा जाए, यह तो सरासर सरकार की ही गलती है। अगर मुख्यमंत्री से काम नहीं हो पा रहा है तो वह अपना इस्तीफा सौंप दें। किसी और को सरकार संभालने दे। अगर हम लोग अनाज नहीं उगाएंगे तो फिर लोगों को खाना तक नसीब नहीं होगा जो सबसे मूलभूत आवश्यकता है जीवन की। उसका भी यह सरकार अनदेखी कर रही है।

अधिकारियों और सरकार पर निकाली भड़ास

गांव भगवानपुर के किसान ऋषि मुनि का कहना है कि समय से किसानों को खाद और बीज उपलब्ध हो जाए तो किसान कड़ी मेहनत से खेती कर अच्छी पैदावार कर सकते हैं। लेकिन समय पर खाद नहीं मिलने से किसान लाचार हैं। लोगों का मन इन भ्रष्ट अधिकारियों से और सरकार से उड़ चुका है यह केवल वादे करती है लेकिन बिल्कुल नहीं निभा पाती और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।

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