करोड़ों रुपये बर्बाद होने के बाद औरंगाबाद में पनबिजली परियोजनाओं का काम फिर से शुरू, अब ऐसा न हो जाए

तय किया गया कि मार्च 2020 से उत्पादन का काम शुरू हो जाएगा लेकिन करीब 18 महीना विलंब होने के बावजूद निर्माण कार्य पूर्ण होता नहीं दिख रहा। संबंधित इंजीनियर मनीष कुमार ने बताया कि नवंबर 2020 से कार्यारंभ हुआ है।

Prashant KumarWed, 04 Aug 2021 03:19 PM (IST)
पानी से बिजली बनाने की योजना फिर से शुरू। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद)। वर्ष 2002 में पटना कैनाल के किनारे सिपहां में जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। इसे 2013 में पूर्ण होना था, लेकिन अचानक काम 2012 में ही बंद हो गया। नतीजा 500 गुणा 2 की यह परियोजना खटाई में पड़ गई थी। इस यूनिट के निर्माण में खर्च किया गया करोड़ों रुपये बर्बाद हो गया।

अब फिर से इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ और तय किया गया कि मार्च 2020 से उत्पादन का काम शुरू हो जाएगा, लेकिन करीब 18 महीना विलंब होने के बावजूद निर्माण कार्य पूर्ण होता नहीं दिख रहा। संबंधित इंजीनियर मनीष कुमार ने बताया कि नवंबर 2020 से कार्यारंभ हुआ है। पहले से आधार बना हुआ था। अब जो उनकी कंपनी को काम मिला है तो 80 फीसदी उनके हिस्से का काम हो गया है।

ईएम अर्थात इलेक्ट्रिकल साइड से जो काम होना है उसके चलते विलंब हो रहा है। बताया गया कि अभी तक इससे संबंधित टेंडर ही फाइनल नहीं हुआ है जिस कारण समस्या आ रही है। सीआइपीएल और जेवी कंपनी यहां निर्माण का कार्य करा रही है। इसे अवधि विस्तार भी मिल चुका है। बताया गया कि टरबाइन के हिस्से का काम तब तक नहीं होगा जब तक ईएम का काम नहीं हो जाता है।

अन्य तीन परियोजनाओं का हाल भी बेहाल

सिपहां की तरह ही जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य इसी नहर पर वलीदाद में भी हो रहा है। वहां 500 केवी का एक यूनिट बन रहा है। जिसका काम 70 फीसदी हो गया है। तेजपुरा में 750 केवी का दो यूनिट निर्माण होना है। यहां भी करीब 99 फीसदी कार्य हो गया है। सिर्फ नहर से संबंधित कार्य शेष है। डीहरा में 500 गुणा 2 का निर्माण होना है। यहां अभी भूमि अधिग्रहण का काम ही 25 से 30 फीसदी बाकी है।

आठ बार मुख्यमंत्री का शपथ किंतु योजना अधूरा

12 जनवरी 2002 को सिपहां में निर्माण का कार्य शुरू हुआ था। इस नहर पर निर्माणाधीन और निर्मित तमाम जल विद्युत परियोजना वर्ष 2002 में ही स्वीकृत हुई थी। तब से बिहार में आठ बार मुख्यमंत्री (Bihar CM) का शपथ ग्रहण समारोह तो हुआ लेकिन यह परियोजनाएं लंबित रहीं। जब योजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ था तो राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थी। उसके बाद दो बार नीतीश कुमार (Nitish Kumar) शपथ ग्रहण लिए, जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) मुख्यमंत्री बने और उसके बाद चार बार फिर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने। सरकारें आती-जाती रही और उसी तरह काम भी बंद और चालू होता रहा। लोगों को अब उम्मीद है कि निर्माण कार्य फाइनल हो सकेगा, लेकिन कब तक, यह तो निर्माण से जुड़ी एजेंसी भी कहने की स्थिति में नहीं है।

अकेले सिपहां ही 13 करोड़ की योजना

सिर्फ सिपहां परियोजना पर राज्य मंत्रिमंडल की फरवरी 2012 में हुई बैठक में दी गई स्वीकृति के अनुसार 13.02 करोड़ रुपए खर्च होने थे। 12.07 करोड़ रुपए नाबार्ड से बतौर ऋण प्राप्त है, जबकि राज्य निधि से 94.40 लाख रुपये खर्च होने थे। इसी बैठक में निर्माण की मंजूरी दी गई थी। यह राशि का सर्वाधिक हिस्सा बर्बाद हो गया। अब परियोजना कितने की है, यह स्थल पर किसी ने नहीं बताया।

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