गया में ABVP ने फूंका मगध विवि के कुलपति का पुतला, डीपी त्रिपाठी का इस्‍तीफा राजभवन से स्‍वीकार

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की मानपुर इकाई की ओर से बुनियादगंज थाना के चार मुहाने पर गुरुवार को मगध विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेन्द्र प्रसाद का पुतला दहन किया गया। उनके विरोध में जमकर नारे लगाए गए।

Vyas ChandraPublish:Fri, 03 Dec 2021 07:49 AM (IST) Updated:Fri, 03 Dec 2021 07:49 AM (IST)
गया में ABVP ने फूंका मगध विवि के कुलपति का पुतला, डीपी त्रिपाठी का इस्‍तीफा राजभवन से स्‍वीकार
गया में ABVP ने फूंका मगध विवि के कुलपति का पुतला, डीपी त्रिपाठी का इस्‍तीफा राजभवन से स्‍वीकार

मानपुर (गया), जागरण संवाददाता। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की मानपुर इकाई की ओर से बुनियादगंज थाना के चार मुहाने पर गुरुवार को मगध विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेन्द्र प्रसाद का पुतला दहन किया गया। उनके विरोध में जमकर नारे लगाए गए। अभाविप मानपुर नगर मंत्री सुजीत कुमार ने कहा कि कुलपति ने मगध विश्वविद्यालय के गौरवपूर्ण इतिहास को धूमिल करने का काम किया है। आज तक उनका इस्तीफा न देना उनकी तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। किस प्रकार वो खुद को शिक्षक न समझकर तानाशाह के रूप में काम कर रहे हैं। यह अत्‍यंत निंदनीय है। इससे विवि की गरिमा धूमिल हुई है। इसी को लेकर उनके कार्यकलाप से नाराज परिषद के लोगों ने उनका पुतला दहन करते हुए उन्हें पद से निष्काषित करने की मांग राज्यपाल से की है। इस मौके पर मगध विश्वविद्यालय छात्रावास कल्याण प्रमुख पियूषराज , अजीत, राजा कुमार, रोहित , सूरज, दिलीप, ऋषि , सनी, मंतोष्र सुमन आदि उपस्थित थे।

राजभवन ने स्‍वीकार किया वित्‍त पदाधिकारी का इस्‍तीफा 

मगध विश्वविद्यालय (Magadh University) के वित्त पदाधिकारी रहे डीपी त्रिपाठी (Finance Officer DP Tripathi) का इस्तीफा गुरुवार को राजभवन (Raj Bhawan) द्वारा स्वीकार कर लिया गया। हालांकि इस पद पर किसी की नियुक्ति नहीं की गई है और ना ही किसी को प्रभारी बनाया गया है। राज्यपाल के संयुक्त सचिव द्वारा जारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है कि राज्यपाल ने मविवि के वित्त पदाधिकारी रहे डीपी त्रिपाठी का तत्काल प्रभाव से इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। बता दें कि 17 नवंबर को निगरानी की विशेष इकाई द्वारा मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद के खिलाफ की गई जांच में फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ था और कुलपति लंबे समय के लिए आकस्मिक अवकाश पर चले गए। उनके जाने के बाद वित्त पदाधिकारी त्रिपाठी अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। लंबे समय बाद यह इस्‍तीफा स्‍वीकार किया गया है।