सासाराम में चार कमरे में पढ़ते हैं 700 बच्चे, उर्दू मध्य विद्यालय में छात्र-छात्राओं के लिए सिर्फ एक शौचालय

सासाराम में चार कमरे में 700 छात्र छात्राएं पढ़ने को मंजूर है। आलम यह है कि उर्दू मध्य विद्यालय में इतने छात्रों के बीच सिर्फ एक शौचालय की व्यवस्था है।जानकारी के अनुसार 1983 में यह विद्यालय बनकर तैयार हुआ था।

Rahul KumarSun, 28 Nov 2021 02:10 PM (IST)
सासाराम के उर्दू मध्य विद्यालय के जर्जर कमरे में पढ़ते छात्र। सांकेतिक तस्वीर

मोहनियां(सासाराम), संवाद सहयोगी। नगर में शिक्षा का हाल बेहाल है। विद्यालयों में समस्याओं का अंबार है। सरकारी मानकों के अनुरूप किसी विद्यालय में संसाधन नहीं हैं। समस्याओं के बीच पठन-पाठन कार्य चुनौतीपूर्ण है। नगर का उर्दू मध्य विद्यालय समस्याओं से जूझ रहा है। यहां चार कमरों में सात सौ छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं। 13 शिक्षक-शिक्षिकाओं पर इनके भविष्य संवारने की जिम्मेदारी है। सरकारी मानक के अनुरूप यहां न तो शिक्षक हैं न ही कमरे। उर्दू मध्य विद्यालय की समस्याओं को देखने के बाद सरकारी तौर पर शिक्षा में गुणात्मक सुधार की बात बेमानी लगती है।

चार कमरों में 700 विद्यार्थी की होती है पढ़ाई

मोहनियां के वार्ड संख्या 11 में अवस्थित यह विद्यालय समस्याओं का दंश झेल रहा हैं। समस्या के समाधान के लिए विद्यालय की तरफ से सीएम, डीएम से लेकर शिक्षा विभाग के सभी पदाधिकारियों तक गुहार लगाई गई। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मध्य विद्यालय में पांच कमरों का दो मंजिला भवन है। भूतल पर तीन व ऊपर में दो कमरे हैं। इसमें से एक कमरे में कार्यालय चलता है। जिसकी लंबाई चौड़ाई इतनी कम है कि उसमें टेबल व कुर्सी रखने के बाद एक-दो आलमारी रखने की भी जगह नहीं बचती। यहां मात्र चार कमरों में विद्यालय में नामांकित 700 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं। यहां एक से लेकर आठवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। इस विद्यालय में वार्ड संख्या नौ, 10, 11 व 12 के छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने आते हैं।

बरकत नगर की घनी आबादी में यह विद्यालय अवस्थित है। विद्यालय के कमरों में दिन में भी अंधेरा रहता है।  विद्यालय के तीन तरफ से रास्ता है। जिसे देखते हुए बरामदे के आगे दीवार का निर्माण कराया गया है। इस कारण विद्यालय में दिन में हीं अंधेरा रहता है। यही हाल सभी कमरों का है। जिस विद्यालय में मात्र चार कमरों में सात सौ बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हो तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि विद्यालय की क्या स्थिति होगी। विद्यालय में मात्र एक शौचालय है।

38 वर्ष पहले बना था विद्यालय 

38 वर्ष पहले 1983 में यह विद्यालय बनकर तैयार हुआ था। साढे तीन दशक बाद विद्यालय की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। जिसके कारण यह कभी भी ध्वस्त हो सकता है। बरसात में बारिश का पानी छत से टपक कर कमरे में गिरता है। जिससे पठन-पाठन बाधित होता है। बारिश शुरू होने के बाद विद्यालय बंद करना शिक्षकों की मजबूरी है। विद्यालय में 13 शिक्षक शिक्षिका है। जिसमें शिक्षिकाओं की संख्या सात है। सरकारी मानक के अनुसार 40 बच्चों पर एक कमरा व एक शिक्षक होने चाहिए। शिक्षकों की संख्या तो संतोषजनक है लेकिन कमरों की संख्या काफी कम है।

700 छात्र-छात्राओं के लिए सिर्फ एक शौचालय

विद्यालय की एचएम अफसाना जमाल ने बताया कि उर्दू मध्य विद्यालय में समस्याओं का अंबार है। चार कमरों व बरामदे में सात सौ छात्र-छात्राओं को बैठाकर पढ़ाया जाता है। बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण विद्यालय को दो शिफ्ट में चलाया जाता है। विद्यालय में मात्र एक शौचालय होने से काफी दिक्कत होती है। सात सौ बच्चों पर एक शौचालय का होना बहुत बड़ी समस्या है। विद्यालय की समस्याओं के समाधान के लिए सूबे के मुख्यमंत्री को दो-दो बार पत्र लिखा गया है। वहीं कैमूर के जिलाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी व प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को भी लगातार पत्र भेजकर विद्यालय को समस्याओं से मुक्ति दिलाने की गुहार लगाई जा रही है। लेकिन अभी तक कहीं से कोई पहल नहीं हुई है। 

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