मानपुर व बाराचटी के 350 किसान उपजाएंगे मशरूम, केंद्र सरकार देगी लाखों की मदद

सेंट्रल स्कीम में अगले पांच से छह वर्षों में मशरूम उत्पादन को लेकर सरकार 30 लाख रुपए तक सहयोग के रूप में देगी। मशरूम से जुड़े कई उत्पाद भी किसानों के हाथों तैयार होंगे। जो गया के अलावा दूसरे शहरों के बाजार तक पहुंचेंगे।

Sumita JaiswalSun, 07 Nov 2021 01:00 PM (IST)
गया जिले में मशरूम का वन डिस्ट्रीक वन प्रोडक्ट के रूप में हुआ चयन। जागरण फोटो।

गया, जागरण संवाददाता। जिले में वन डिस्ट्रीक वन प्रोडक्ट के तहत मशरूम का चयन किया गया है। किसानों को वैकल्पिक खेती के रूप में मशरूम उत्पादन से जोड़ने की योजना बनी है। मानपुर व बाराचटी प्रखंड को पहले चरण में चुना गया है। इन दोनों प्रखंड के करीब 350 किसानों को मशरूम उत्पादन से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाई जाएगी। योजना में भारत सरकार की ओर से किसान समूहों को आर्थिक मदद दी जाएगी। इन दोनों प्रखंडों में कृषक उत्पादक संगठन का निबंधन हो चुका है। जिलाधिकारी के स्तर से इसकी सहमति मिल चुकी है। नाबार्ड के डीडीएम उदय कुमार ने कहा कि सेंट्रल स्कीम में अगले पांच से छह वर्षों में मशरूम उत्पादन को लेकर सरकार 30 लाख रुपए तक सहयोग के रूप में देगी। मशरूम से जुड़े कई उत्पाद भी किसानों के हाथों तैयार होंगे। जो गया के अलावा दूसरे शहरों के बाजार तक पहुंचेंगे।

उद्यान विभाग से 35 हजार मशरूम किट का लक्ष्य, 90 प्रतिशत अनुदान

जिला उद्यान विभाग की ओर से भी मशरूम की उपज को बढ़ावा देने की योजना बनी है। लक्ष्य 35 हजार किट तय हुआ है। जिला उद्यान पदाधिकारी शशांक कुमार ने बताया कि प्रति बैग 90 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा। लक्ष्य में 30 हजार सामान्य जाति के लिए व पांच हजार एससी-एसटी के लिए है। इच्छुक किसान आनलाइन आवेदन करें। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खादय उद्यम उन्यन योजना में 35 प्रतिशत व अधिकतम 10 लाख का अनुदान देय है। इसमें मशरूम का प्रोसेसिंग प्लांट भी लगाया जा सकता है।

तापमान नीचे आते ही उगने लगे मशरूम

जिले के कई प्रखंडों में मशरूम की अच्छी उपज होती है। जैसे-जैसे तापमान और नीचे आएगा इसकी उपज में तेजी आएगी। कोंच प्रखंड के बड़गांव के युवा किसान प्रभात हर साल मशरूम को लेकर किसानों के साथ मिलकर काम करते हैं। इस बार भी तैयारी शुरू कर दी है। इनके गांव में मशरूम उगने भी लगा है। बाजार में भी पहुंच रहा है। पिछले साल समर्थ संस्थान व नाबार्ड की मदद से एक लाख मशरूम बैग का लक्ष्य हासिल किया गया था। प्रभात ने कहा कि सैकड़ों किसान उनके साथ जुड़े हुए हैं। इस बार भी मशरूम को लेकर बेहतर योजना बनाएं हैं। किसानों की सुविधा के लिए एसी मशरूम वैन भी खरीदी है।

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