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एक वाहन के सहारे फतेहपुर के 23 पंचायतों की होती निगरानी, लॉकडाउन प्रभावी बनाने में बढ़ी परेशानी

फतेहपुर की सड़क पर थाने का एक मात्र वाहन। जागरण।

विधि व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पुलिस को वाहनों की आवश्यकता पड़ती है। मगर एक वाहन के सहारे 23 पंचायतों की निगरानी संभव नहीं दिखता। बात गया जिले के फतेहपुर थाना की है। शराब एवं कोयला की तस्करी को रोकना भी चुनौती है।

Prashant KumarMon, 17 May 2021 07:44 AM (IST)

फतेहपुर (गया), संवाद सूत्र। विधि व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पुलिस को वाहनों की आवश्यकता पड़ती है। मगर एक वाहन के सहारे 23 पंचायतों की निगरानी संभव नहीं दिखता। बात गया जिले के फतेहपुर थाना की है। फतेहपुर थाना की पुलिस को करीब 50 किलोमीटर में फैले 23 पंचायतों में कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है। लॉकडाउन में पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।

थाना क्षेत्र में गुरपा, गोपी मोड़, नंगवा, करियादपुर, डुमरी चट्टी, पहाड़पुर जमहेता एवं फतेहपुर जैसे बड़े बाजार है। इन क्षेत्रों में लॉकडाउन के नियम का पालन कराने की जिम्मेदारी बड़ीहै। लेकिन, संसाधनों के अभाव में पुलिस मूकदर्शक बन कर रह गई है। मात्र एक वाहन उपयोग की स्थिति में रहने के कारण सभी क्षेत्रों में पहुंच पाना एक दिन में संभव नहीं होता। वहीं झारखंड की सीमा से सटे होने के कारण शराब एवं कोयला की तस्करी को रोकना भी चुनौती है। एक वाहन के कारण पुलिस जब मौके पर समय नहीं पहुंचती है तो ग्रामीणों की नाराज़गी भी झेलनी पड़ती है।

तीन माह में स्थिति हुई दयनीय

पुलिसिंग का काम करने का सभी पदाधिकारियों का अलग-अलग तरीका होता है। पूर्व थानाध्यक्ष अबुजर हुसैन अंसारी के द्वारा संसाधनों के अभाव के बाद भी कानून व्यवस्था कायम रखने में महारत हासिल थी। प्रतिदिन वाहन एवं मास्क चेकिंग अनिवार्य किया जाता था। विषम परिस्थितियों में भी उनके द्वारा वाहनों की व्यवस्था कर लिया जाता था। वहीं नये थानाध्यक्ष संजय कुमार गत 31 जनवरी को फतेहपुर थाना का कार्यभार संभाला। इनके द्वारा पहले चल रहे तीन समय अवधि गश्ती को बढ़ाकर चार कर दिया गया पर वाहन एवं मास्क जांच धीरे धीरे शिथिल पड़ गया। जांच कम होने से आमलोग ख़ुश हैं, पर यातायात व्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ा है। सिर्फ एक वाहन से दिन रात  क्षेत्र की विधि व्यवस्था बनने का प्रयास किया जा रहा।

क्या कहते है थानाध्यक्ष

थानाध्यक्ष संजय कुमार ने बताया कि थाना में पहले से रहे जीप खराब हो गया है उससे बनने के लिए विभाग को भेजा गया पर एक सप्ताह के बाद भी वाहन नहीं बन सका है। वहीं एक बोलोरो वाहन के सहारे कैदी को भेजना,क्षेत्र में गश्ती करने में थोड़ी समस्या आ रही है। वाहन के बनकर आने के बाद ही दिक्कत कम होगी।

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