कैमूर में मार्केट कॉम्प्लेक्स का दुकानदारों के यहां 20 लाख किराया बकाया, प्रशासन की नोटिस के बाद भी नहीं हुई बकाया राशि जमा

मार्केट काम्प्लेक्स की दुकानें जर्जर हो गई हैं। फिर भी बकाया 20 लाख रुपये का भुगतान नहीं हो सका। किराया जमा करने की निर्धारित तिथि भी बीत गई लेकिन दुकानदार किराया जमा नहीं कर सके। मार्केट काम्प्लेक्स समिति बीते अप्रैल में सख्ती से बकाया किराया वसूली का फैसला लिया था।

Prashant Kumar PandeySun, 28 Nov 2021 03:05 PM (IST)
कैमूर में मार्केट कॉम्प्लेक्स का दुकानदारों के यहां 20 लाख किराया बकाया

 संवाद सूत्र, रामगढ़ः रामगढ़ बाजार स्थित मार्केट काम्प्लेक्स की दुकानें जर्जर हो गई हैं। फिर भी बकाया 20 लाख रुपये का भुगतान नहीं हो सका। किराया जमा करने की निर्धारित तिथि भी बीत गई लेकिन दुकानदार किराया जमा नहीं कर सके। मार्केट काम्प्लेक्स समिति बीते अप्रैल माह में सख्ती से बकाया किराया वसूली का फैसला लिया था। जिसके कारण कई दुकानों में जर्जरता की वजह से ताले लटक गए थे। फटी छत व दीवारों में दरार की वजह से कई दुकाने बंद भी हो गई थी तो कई दुकानदार अपनी दुकानों की मरम्मत कराने में जुट गए थे। 

उधर मार्केट काम्प्लेक्स समिति ने अब तक चार बार बकाया किराया चुकाने की नोटिस भेज चुकी है । दुर्गा चौक के पास तस्सवर अंसारी की दुकान काफी दिनों से बंद है। उनकी दुकान की छत फट गई है। बारिश होने पर पानी रिसने से काउंटर खराब हो जाता है। उन्होंने दुकान खोला तो उसकी जर्जरता दिखी। उसमें बैठना खतरे से खाली नहीं। उधर ओमप्रकाश ने अपनी दुकान की मरम्मत खुद कराई। इधर बारिश होने पर कई दुकानों में छत से पानी टपकता है। ऐसे में दुकानदारों को 31 मार्च तक किराया जमा कर देना था। अन्यथा बकाए किराया वाली दुकानों को सील किया जाएगा। लेकिन हुआ कुछ नहीं। न तो बकाया किराया ही जमा हो सका और न ही प्रशासन द्वारा किराया वसूली के लिए कोई सख्ती बरती गई।

 मार्केट काम्प्लेक्स के सचिव सह बीडीओ प्रदीप कुमार के अनुसार बार-बार नोटिस देने के बावजूद दुकानदारों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। कुछ लोग राशि जमा किए हैं। लेकिन इससे काम नहीं चलेगा। पंचायत चुनाव अब यहां का बीत गया है। इस दिशा में अब ठोस कार्रवाई होगी। मार्केट काम्प्लेक्स की मरम्मत कराना है। राशि नहीं है। लाखों रुपये बकाया है। आखिरी चेतावनी के बाद भी लोगों पर इसका असर नहीं पड़ा। निर्धारित अवधि में दुकानदार राशि का प्रबंध कर बकाया किराया चुका देते तो मरम्मत का कार्य भी हो गया होता। उन्होंने बताया कि ऐसी दुकानों को जांच कर चिह्नित किया जाएगा। जिसमें बाहरी व्यक्ति दुकान का संचालन कर रहे हैं। जांच में सही पाए जाने पर ऐसी दुकानों को स्वतः रद्द कर दिया जाएगा। बता दें कि खजाने में महज डेढ़ लाख है और दुकानदारों का अक्सर दबाव रहता है कि जर्जर दुकानों की मरम्मत हो। बीते बरसात के मौसम में राशि नहीं होने के कारण समिति ने मरम्मत से हाथ खड़ा कर लिए थे। समिति का कहना है कि 194 कमरों वाले काम्प्लेक्स की दुकानों की मरम्मत के लिए कम से कम दस लाख चाहिए।

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